बक्सर। उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले में एक भीषण रेल हादसे ने तीन परिवारों की खुशियां छीन लीं। गहमर और बारा रेलवे स्टेशन के बीच रविवार शाम इंदौर-पटना एक्सप्रेस (19321) की चपेट में आने से बिहार के तीन मजदूरों की मौके पर ही मौत हो गई। ये तीनों मजदूर बक्सर स्थित चौसा थर्मल पावर प्लांट में कार्यरत थे और छुट्टी के दिन बाजार से लौट रहे थे।

पटरियों पर लापरवाही पड़ी भारी

​घटना के संबंध में चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। ट्रेन के लोको पायलट विकास कुमार के अनुसार, तीनों मजदूर डाउन ट्रैक पर एक-दूसरे के कंधे पर हाथ रखकर चल रहे थे। वे सामने से (अप लाइन) आ रही दूसरी ट्रेन के यात्रियों को हाथ हिलाकर अभिवादन कर रहे थे। इसी बीच पीछे से 130 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से इंदौर-पटना एक्सप्रेस आ गई। दोनों ट्रेनों के चालकों ने लगातार हॉर्न बजाकर उन्हें सचेत करने की कोशिश की, लेकिन शोर या ध्यान भटकने के कारण वे ट्रैक से नहीं हटे। रफ्तार इतनी तेज थी कि इमरजेंसी ब्रेक लगाना संभव नहीं हो सका।

​मृतकों की पहचान और पारिवारिक स्थिति

  • ​सोमवार शाम को परिजनों के पहुंचने के बाद मृतकों की शिनाख्त हो सकी। मृतकों में शामिल हैं:
  • ​गुलचंद कुमार (38): निवासी मुजफ्फरपुर। ये इंसुलेशन विभाग में खलासी थे। इनके पीछे पत्नी चिंकी कुमारी और दो बच्चे हैं।
  • ​जयनाथ सहनी (33): निवासी मुजफ्फरपुर। ये पिछले दो साल से प्लांट में काम कर रहे थे। इनके परिवार में पत्नी पिंकी और चार बच्चे हैं।
  • ​पप्पू कुमार (33): निवासी वैशाली।
  • ​कंपनी का रुख: आर्थिक सहायता पर बयान

​ये मजदूर एलएंडटी (L&T) के अधीन इंसुलर टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड में दैनिक मजदूरी पर काम करते थे, जहां उन्हें 630 रू. प्रतिदिन मिलते थे। कंपनी के मैनेजर अभय तिवारी ने बताया कि नियमानुसार मजदूरों का इंश्योरेंस था, लेकिन हादसा कार्यस्थल (कंपनी परिसर) के बाहर हुआ है, इसलिए तकनीकी रूप से बीमा का लाभ मिलना कठिन है। हालांकि, कंपनी ने मानवीय आधार पर निजी स्तर पर आर्थिक मदद देने का भरोसा दिलाया है।

​जांच और पोस्टमार्टम

​गहमर रेलवे स्टेशन के डिप्टी स्टेशन मास्टर की सूचना पर पहुंची पुलिस ने क्षत-विक्षत शवों को एकत्र कर पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भेजा। परिजनों के करुण क्रंदन से पूरे अस्पताल परिसर का माहौल गमगीन हो गया। फिलहाल पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।