पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने बांग्लादेश की अथॉरिटीज से अपील की है कि उन्हें पिछले साल सुनाई गई मौत की सजा को कानूनी रूप से निरस्त किया जाए. उन्होंने यह भी मांग की कि उनके खिलाफ चल रहा ट्रायल अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार और पूरी निष्पक्षता के साथ किया जाए, ताकि न्यायिक प्रक्रिया की पारदर्शिता और विश्वसनीयता बनी रहे. ब्रिटिश लॉ फर्म ने बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के ट्रायल को चुनौती दी है। इसे अवैध और पक्षपातपूर्ण बताते हुए पुनः सुनवाई की मांग की गई।
शेख हसीना ने मांग की कि उनके खिलाफ चल रहा ट्रायल अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार और पूरी निष्पक्षता के साथ किया जाए, ताकि न्यायिक प्रक्रिया की पारदर्शिता और विश्वसनीयता बनी रहे.
बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के खिलाफ चलाए गए ट्रायल को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। एक प्रमुख ब्रिटिश लॉ फर्म किंग्सले नेपले ने इस मामले में हस्तक्षेप करते हुए ट्रायल की निष्पक्षता और वैधता पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
शेख हसीना की इस मांग को उनके समर्थक न्याय सुनिश्चित करने की दिशा में जरूरी कदम बता रहे हैं, वहीं इस मामले ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी ध्यान आकर्षित किया है. यह कदम बांग्लादेश राष्ट्रवादी पार्टी (BNP) के तारिक रहमान के नेतृत्व में ढाका में नई सरकार के गठन के एक महीने बाद उठाया गया है. वो अब बांग्लादेश में पार्टी को एक्टिव करने की संभावना तलाश रहे हैं.
30 मार्च को लिखे गए इस पत्र में 5 मांगें शामिल थीं, जिनमें से एक यह थी कि शेख हसीना के खिलाफ दिए गए फैसले और सजा को ‘तत्काल कानूनी रूप से अमान्य घोषित करते हुए रद्द किया जाए’ और मृत्युदंड को लागू करने के लिए कोई कदम न उठाया जाए.
लंदन स्थित इस लॉ फर्म ने बांग्लादेश के इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल को नोटिस भेजकर कहा है कि हसीना के खिलाफ सुनवाई अन्यायपूर्ण और अवैध परिस्थितियों में की गई। फर्म ने दो हफ्तों के भीतर जवाब मांगा है
पत्र में आगे कहा गया कि हसीना के खिलाफ आगे की सभी कार्रवाई अंतर्राष्ट्रीय निष्पक्ष सुनवाई मानकों के पूर्ण अनुपालन में की जानी चाहिए, जिसमें उचित सूचना, सभी आरोपों और सबूतों का खुलासा, अपनी पसंद के कानूनी प्रतिनिधि के साथ बचाव में भाग लेने का अवसर और ‘एक स्वतंत्र और निष्पक्ष न्यायाधिकरण के समक्ष सुनवाई’ शामिल है.
लॉ फर्म का आरोप है कि 78 वर्षीय हसीना के खिलाफ ट्रायल उनकी अनुपस्थिति में चलाया गया, जो अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत उनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है। नोटिस में कहा गया कि उन्हें सबूतों तक पहुंच, आरोपों की जानकारी और अपना पक्ष रखने का उचित मौका नहीं दिया गया।
बताते चले कि अंतर्राष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण (ICT) बांग्लादेश का एक घरेलू युद्ध अपराध न्यायालय है. इसी ने पिछले साल 17 नवंबर को शेख हसीना को 2024 में छात्र नेतृत्व वाले प्रदर्शनों पर की गई कार्रवाई को मानवता के खिलाफ बताते हुए दोषी ठहराया था और मौत की सजा सुनाई थी.
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