अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ संभावित शांति समझौते को लेकर अपना रुख एक बार फिर स्पष्ट कर दिया है। ट्रंप ने साफ कहा कि जब तक कोई अंतिम और ठोस समझौता नहीं हो जाता, तब तक ईरान पर लगाए गए प्रतिबंधों में कोई ढील नहीं दी जाएगी और न ही उसकी विदेशी संपत्तियों को जारी किया जाएगा।

NBC News के चर्चित कार्यक्रम “Meet the Press” में बातचीत के दौरान ट्रंप से पूछा गया कि क्या भविष्य में ईरान की फ्रीज की गई संपत्तियों को खोला जा सकता है। इसके जवाब में उन्होंने कहा, “अगर ईरान सकारात्मक कदम उठाता है, जिम्मेदार व्यवहार करता है और बातचीत सही दिशा में आगे बढ़ती है, तभी हम इस विषय पर विचार कर सकते हैं।”

लेबनान को लेकर भी स्थिति स्पष्ट

ट्रंप ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी संभावित अंतरिम समझौते में लेबनान को शामिल करने की उनकी कोई मांग नहीं है। उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब ईरान से जुड़ा क्षेत्रीय तनाव 100वें दिन में प्रवेश कर चुका है। हालांकि 8 अप्रैल को संघर्षविराम लागू हुआ था, लेकिन स्थायी शांति समझौते की दिशा में अब तक कोई ठोस प्रगति नहीं हो सकी है।

“ईरान अभी समझौते के लिए तैयार नहीं”

इससे पहले शुक्रवार को भी ट्रंप ने कहा था कि ईरान ने अब तक अमेरिका समर्थित प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया है। उनके अनुसार, ईरानी नेतृत्व की कठोर सोच और अनिच्छा बातचीत में सबसे बड़ी बाधा बनी हुई है।

ट्रंप ने कहा, “वे बेहद दृढ़ और गर्वीले हैं, लेकिन अब उन्हें ऐसे फैसले लेने होंगे जिनकी उन्होंने कभी कल्पना भी नहीं की होगी। उनके पास विकल्प सीमित हैं और इसी वजह से प्रक्रिया में समय लग रहा है।”

दशकों की नीति पर उठाए सवाल

ट्रंप ने ईरान पर वर्षों तक बिना पर्याप्त जवाबदेही के काम करने का आरोप लगाते हुए कहा कि इस मुद्दे का समाधान बहुत पहले हो जाना चाहिए था। उन्होंने कहा, “करीब 47 वर्षों तक ईरान बिना किसी प्रभावी रोक-टोक के अपनी रणनीति पर चलता रहा। यह मामला पहले ही सुलझाया जाना चाहिए था। दुनिया के अन्य नेताओं और पूर्व अमेरिकी प्रशासन को इस दिशा में पहले कदम उठाने चाहिए थे।” ट्रंप के इस बयान को ईरान के प्रति अमेरिका की कड़ी नीति और भविष्य की वार्ताओं के लिए एक स्पष्ट संदेश के तौर पर देखा जा रहा है।

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