​बेगूसराय। जन सुराज के प्रदेश अध्यक्ष मनोज भारती ने विधानसभा चुनाव में पार्टी की हार को लेकर एक बड़ा और ईमानदार आत्म-विश्लेषण प्रस्तुत किया है। बेगूसराय में संगठन की घोषणा के दौरान उन्होंने स्पष्ट रूप से स्वीकार किया कि पार्टी की हार के पीछे सांगठनिक ढांचा तैयार न होना और उम्मीदवारों की घोषणा में देरी जैसे प्रमुख आंतरिक कारण रहे।

​संगठन की कमी और जल्दबाजी बनी बाधा

​मनोज भारती ने कहा कि विधानसभा चुनाव के समय जन सुराज एक नए राजनीतिक दल के रूप में स्थापित होने की प्रक्रिया में था। उन्होंने बताया, हम लोग चुनाव के दौरान अत्यधिक जल्दबाजी में थे। हमने जिला, अनुमंडल और प्रखंड स्तर पर तो संगठन खड़ा कर लिया, लेकिन गांव और बूथ स्तर तक हमारी पहुंच मजबूत नहीं हो पाई। भारती के अनुसार, बूथ लेवल पर प्रभावी ढांचा न होने के कारण चुनाव के दौरान कई व्यावहारिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ा, जिसका सीधा असर परिणामों पर दिखा।

​हार के बाहरी कारण: कैश ट्रांसफर पर उठाए सवाल

​हार के विश्लेषण को दो भागों (आंतरिक और बाहरी) में बांटते हुए भारती ने सत्तारूढ़ दल और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर भी तीखे प्रहार किए। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव के अंतिम समय में सरकार द्वारा सीधे मतदाताओं के खातों में 10-10 हजार रुपये ट्रांसफर किए गए। उन्होंने इसे आचार संहिता का खुला उल्लंघन बताते हुए कहा कि चुनाव आयोग ने इस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की।

​विपक्ष की चुप्पी और जन सुराज की कानूनी लड़ाई

​भारती ने मुख्य विपक्षी दलों पर भी निशाना साधा और कहा कि इस मुद्दे पर विपक्ष को जितना मुखर होना चाहिए था, वह नहीं रहा। उन्होंने घोषणा की कि जन सुराज इस मुद्दे को छोड़ने वाली नहीं है। पार्टी ने पहले ही सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है और हाल ही में हाईकोर्ट में भी रिट याचिका दायर की है ताकि भविष्य के चुनावों में सत्तारूढ़ दल ऐसी लोकतंत्र विरोधी नीतियों का सहारा न ले सके।

​अक्टूबर तक मिशन बूथ को मजबूत करने का लक्ष्य

​भविष्य की रणनीति साझा करते हुए मनोज भारती ने कहा कि पार्टी अब अगले पंचायत चुनाव पर ध्यान केंद्रित कर रही है। आगामी अक्टूबर माह तक जन सुराज गांव और बूथ स्तर पर अपने संगठन को पूरी तरह से पुनर्गठित और मजबूत कर लेगी। पार्टी का लक्ष्य है कि आने वाले समय में जमीनी स्तर पर एक ऐसी टीम खड़ी की जाए जो किसी भी चुनौती का सामना कर सके।