अजय शास्त्री/बेगूसराय। कहते हैं सपने देखने के लिए आंखों की नहीं, बल्कि दिल के दरवाजों के खुले होने की जरूरत होती है। इस कहावत को बिहार के दरभंगा और बेगूसराय के लाल प्रशांत कुमार सिंह ने सच कर दिखाया है। दोनों आंखों से शत-प्रतिशत नेत्रहीन होने के बावजूद प्रशांत ने बिहार बोर्ड की मैट्रिक परीक्षा में लगभग 80% अंक हासिल कर मिसाल पेश की है।
9 साल की उम्र में छिनी रोशनी, पर नहीं खोया हौसला
मूल रूप से बेगूसराय के मटिहानी (शाहपुर) निवासी रणधीर सिंह के 18 वर्षीय पुत्र प्रशांत का जीवन 2017 में अचानक बदल गया। महज 9 साल की उम्र में उन्होंने अपनी आंखों की रोशनी खो दी। जांच में पता चला कि वह ‘रेटिनाइटिस पिगमेंटोसा’ नामक लाइलाज बीमारी से ग्रस्त हैं। परिवार का इकलौता चिराग होने के कारण घर में मातम छा गया और मां ममता कुमारी का बुरा हाल था। इलाज के लिए देश के बड़े अस्पतालों के चक्कर काटे गए, लेकिन चिकित्सा विज्ञान में फिलहाल इसका समाधान न होने के कारण प्रशांत को पढ़ाई छोड़नी पड़ी।
बहन मुस्कान बनी भाई की तीसरी आंख
मुसीबत के इस दौर में प्रशांत की बहन मुस्कान, जो खुद NEET की तैयारी कर रही हैं, अपने भाई की तीसरी आंख बनीं। मुस्कान ने न केवल प्रशांत की पढ़ाई में मदद की, बल्कि उनकी दिनचर्या का हिस्सा बनकर उनका मनोबल बढ़ाया। प्रशांत ने भी हार नहीं मानी और वॉयस टाइपिंग के जरिए ऑनलाइन पढ़ाई शुरू की। खाली समय में वह गिटार बजाकर संगीत की लहरों में अपना सुकून ढूंढने लगे।
प्रशासनिक सहयोग और रामा का साथ
प्रशांत की मां दरभंगा के एक विद्यालय में शिक्षिका हैं, इसलिए प्रशांत की आगे की पढ़ाई दरभंगा में हुई। 2026 की बोर्ड परीक्षा में बैठने की इच्छा एक बड़ी चुनौती थी। दरभंगा के जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) और जिलाधिकारी (DM) के विशेष सहयोग से प्रशांत को एक ‘राइटिंग हेल्पर’ (लेखक सहायक) प्रदान किया गया। आठवीं कक्षा के छात्र ‘रामा’ ने परीक्षा में प्रशांत के जवाबों को कागज पर उतारा। परीक्षा केंद्र पर मौजूद अधिकारी भी प्रशांत के सटीक उत्तर और जज्बे को देखकर दंग रह गए।
DM और शिक्षा विभाग ने किया सम्मानित
प्रशांत की इस अद्वितीय सफलता की गूंज जब बेगूसराय पहुंची, तो जिलाधिकारी श्रीकांत शास्त्री के निर्देश पर शिक्षा विभाग ने उन्हें सम्मानित किया। बेगूसराय के DEO मनोज कुमार ने इसे शिक्षा विभाग के लिए गौरव का क्षण बताया। उन्होंने आश्वासन दिया कि प्रशांत की उच्च शिक्षा के लिए विभाग हर संभव मदद करेगा। आज प्रशांत की इस सफलता पर उनकी बहन मुस्कान और पूरा बिहार गर्व महसूस कर रहा है।
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