पटना। बिहार की राजनीति में एक युगांतकारी परिवर्तन होने जा रहा है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार आज दोपहर 12:30 बजे राज्यसभा सांसद के रूप में पद और गोपनीयता की शपथ लेंगे। इस शपथ ग्रहण को नीतीश के बिहार की सत्ता से केंद्र की राजनीति की ओर बढ़ते एक बड़े कदम के रूप में देखा जा रहा है। शपथ ग्रहण से ठीक पहले, आज सुबह जदयू के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा और राज्यसभा सांसद रामनाथ ठाकुर ने नीतीश कुमार के दिल्ली स्थित आवास पर उनसे मुलाकात की, जहां भविष्य की योजनाओं पर मंथन हुआ।
मोदी-शाह से मुलाकात और नई सरकार का रोडमैप
शपथ ग्रहण के बाद नीतीश कुमार की मुलाकात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से होना प्रस्तावित है। यह बैठक बिहार की भावी राजनीतिक रणनीति के लिहाज से अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है। सूत्रों के अनुसार, इस चर्चा के दौरान बिहार में एनडीए (NDA) की नई सरकार के स्वरूप, नए मुख्यमंत्री के नाम और आगामी मंत्रिमंडल के गठन पर अंतिम मुहर लग सकती है। नीतीश कुमार ने स्वयं संकेत दिए हैं कि वे अब दिल्ली में रहकर राष्ट्रीय राजनीति में अपनी सक्रिय भूमिका निभाएंगे।
हरिवंश की राज्यसभा में पुन: वापसी
जदयू के वरिष्ठ नेता और पूर्व उपसभापति हरिवंश एक बार फिर राज्यसभा का हिस्सा बन गए हैं। गुरुवार को उनका कार्यकाल समाप्त हुआ था, जिसके तत्काल बाद राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें पुन: मनोनीत किया है। इससे स्पष्ट है कि दिल्ली के गलियारों में जदयू और एनडीए के बीच सामंजस्य की कमान अनुभवी हाथों में ही रहेगी।
सत्ता परिवर्तन का घटनाक्रम: 14 अप्रैल को इस्तीफा संभव
बिहार में खरमास की समाप्ति के साथ ही सत्ता की तस्वीर बदलने वाली है। नीतीश कुमार आज शाम पटना लौटेंगे और शनिवार, 13 अप्रैल को अपनी कैबिनेट की आखिरी बैठक की अध्यक्षता करेंगे। जानकारी के अनुसार, 14 अप्रैल को नीतीश कुमार मुख्यमंत्री पद से औपचारिक इस्तीफा दे सकते हैं। इसी दिन एनडीए विधायक दल की महत्वपूर्ण बैठक भी बुलाई गई है, जिसमें नए नेता का चयन कर सरकार बनाने का दावा पेश किया जाएगा।
सियासी तंज और पारिवारिक विरासत पर जवाब
नीतीश के इस कदम पर राजद नेता और लालू यादव की बेटी रोहिणी आचार्य ने सोशल मीडिया के जरिए कड़ा प्रहार किया है। उन्होंने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर तंज कसते हुए लिखा, चाचा जी, लालच बुरी बला है, अब ये एहसास तो आपको हो ही गया होगा! वहीं, जब नीतीश से उनके बेटे निशांत कुमार के सक्रिय राजनीति में आने पर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने स्पष्ट कहा कि इस पर पार्टी के नेता ही मिलकर फैसला करेंगे।
नीतीश कुमार ने मीडिया से मुखातिब होते हुए कहा, मैंने 20 सालों तक बिहार में बहुत काम किया है। अब दिल्ली में काम करूंगा, लेकिन पटना आना-जाना बना रहेगा।
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