पटना। बिहार अब खेलों की दुनिया में अपनी नई पहचान बनाने की ओर अग्रसर है। राज्य के प्रतिभावान खिलाड़ियों को अब तकनीकी और वैज्ञानिक रूप से सशक्त बनाने के लिए बिहार सरकार राज्य का पहला स्पोर्ट्स साइंस सेंटर स्थापित करने जा रही है। लगभग 15 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला यह सेंटर दिल्ली के नेशनल स्पोर्ट्स साइंस सेंटर की तर्ज पर विकसित किया जाएगा।

​राजगीर और पटना में बनेगा केंद्र

​इस आधुनिक केंद्र की स्थापना राजधानी पटना के पाटलिपुत्र स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स और राजगीर खेल अकादमी में की जाएगी। सरकार का लक्ष्य है कि अगले साल तक इसे तैयार कर खिलाड़ियों को सौंप दिया जाए, ताकि वे अपनी ट्रेनिंग को वैज्ञानिक आधार दे सकें।

​वैज्ञानिक तरीके से निखरेगी प्रतिभा

​स्पोर्ट्स साइंस सेंटर का मुख्य उद्देश्य खिलाड़ियों के शारीरिक और मानसिक प्रदर्शन का वैज्ञानिक विश्लेषण करना है। यहां विशेषज्ञों की देखरेख में निम्नलिखित सुविधाएं मिलेंगी:

  • ​प्रदर्शन विश्लेषण: खिलाड़ियों की ताकत, सहनशक्ति और गति को बढ़ाने के लिए डेटा-आधारित ट्रेनिंग दी जाएगी।
  • ​चोट प्रबंधन: खेल के दौरान लगने वाली चोटों को रोकने और चोटिल होने पर जल्द रिहैबिलिटेशन (पुनर्वास) के लिए आधुनिक मशीनें और तकनीक उपलब्ध होंगी।
  • ​स्पोर्ट्स मसाज और रिकवरी: खिलाड़ियों की मांसपेशियों की रिकवरी के लिए स्पोर्ट्स मसाज की विशेष सुविधा होगी।
  • ​विशेषज्ञों की टीम: यहां फिजियोलॉजी, बायोमैकेनिक्स, खेल पोषण और खेल मनोविज्ञान के विशेषज्ञ तैनात रहेंगे।
  • ​राजगीर में स्थापित होगी ‘महिला फुटबॉल एकेडमी’
  • ​बिहार के लिए एक और गौरव की बात यह है कि राजगीर खेल परिसर में विशेष रूप से महिला फुटबॉल एकेडमी खोली जाएगी। यह एकेडमी केवल महिला खिलाड़ियों के लिए समर्पित होगी, जहां भारतीय टीम को ट्रेनिंग देने की भी योजना है। साथ ही, यहां साल भर में कम से कम 12 अंतरराष्ट्रीय मैचों का आयोजन किया जाएगा।

​AIFF के साथ रणनीतिक साझेदारी

​अखिल भारतीय फुटबॉल महासंघ (AIFF) के अध्यक्ष ने बिहार की खेल प्रतिभाओं को तराशने के लिए एक ‘रणनीतिक साझेदारी’ का प्रस्ताव दिया है। इस साझेदारी के जरिए राज्य में फुटबॉल के बुनियादी ढांचे को विश्वस्तरीय बनाया जाएगा, जिससे ग्रामीण इलाकों से आने वाली प्रतिभाओं को वैश्विक मंच मिल सके।