नई दिल्ली के कर्तव्य भवन-2 में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में मंत्रियों के अनौपचारिक समूह (IGoM) की चौथी बैठक हुई. बैठक में पश्चिम एशिया के मौजूदा हालात पर विस्तार से चर्चा की गई. इस दौरान रक्षा मंत्री ने कहा कि प्रभावित इलाके की स्थिति अभी भी अनिश्चित और काफी तनावपूर्ण है. ऐसे में भारत को हर परिस्थिति के लिए तैयार रहना होगा… चाहे हालात शांत हों या फिर तनाव और बढ़ जाए. बैठक में यह भी देखा गया कि अगर हालात बिगड़ते हैं तो ऐसे वक्त के लिए देश की तैयारी कैसी है और आगे क्या कदम उठाने चाहिए, ताकि किसी भी स्थिति में भारत अपने हितों की रक्षा कर सके.

इस उच्चस्तरीय बैठक में विदेश मंत्री एस जयशंकर, स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा, केंद्रीय मंत्री मनसुख मंडाविया, केंद्रीय आवास और शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल सहित कई अन्य मंत्री और वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे. पश्चिम एशिया की स्थिति का भारत पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों पर विस्तार से चर्चा की गई.

फिर बंद हुआ स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज, भरतिए जहाज पर हुई फायरिंग

होर्मुज जलडमरूमध्य में एक बार फिर तनाव बढ़ गया है. ब्रिटिश सेना ने शनिवार को पुष्टि की कि ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स की 2 गनबोट्स ने उस टैंकर पर गोलीबारी की, जो इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से गुजर रहा था. हालांकि, यूके मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस सेंटर ने बताया कि टैंकर और उसमें सवार चालक दल पूरी तरह सुरक्षित हैं. जहाज की पहचान और उसका गंतव्य सार्वजनिक नहीं किया गया है. इस घटना से पहले ईरान ने घोषणा की थी कि उसने होर्मुज जलडमरूमध्य पर फिर से कड़े प्रतिबंध लागू कर दिए हैं.

जानकारी के अनुसार जिन दो जहाजों पर फायरिंग हुई उनमें से एक भारतीय झंडे वाला तेल टैंकर भी शामिल था. यह जानकारी कई समुद्री और सुरक्षा सूत्रों ने दी है, जिसे शिपिंग मॉनिटर टैंकर ट्रैकर्स ने रिपोर्ट किया. हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक भारतीय जहाज लगभग 20 लाख बैरल इराकी तेल लेकर जा रहा था. ब्रिटेन के समुद्री निगरानी केंद्र मैरिटाइम ट्रेड ऑपरेशन सेंटर के मुताबिक, ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड की दो गनबोट्स टैंकर्स के पास आईं और बिना रेडियो चेतावनी के फायरिंग शुरू कर दी.

विभिन्न मंत्रालय और एजेंसियां पूरी तरह सतर्कता बरत रहे

मौजूदा स्थिति के मद्देनजर विभिन्न मंत्रालय और एजेंसियां पूरी तरह सतर्कता बरत रहे हैं ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत कार्रवाई की जा सके. विभिन्न मंत्रालयों के बीच समन्वय को और मजबूत किया जा रहा है, जिससे किसी भी संकट की स्थिति में तेजी से निर्णय लिए जा सकें.

इससे पहले, 8 अप्रैल को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में अनौपचारिक मंत्री समूह की तीसरी बैठक आयोजित की गई थी. उस बैठक में भी क्षेत्र की मौजूदा स्थिति और उसके भारत पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों की विस्तृत समीक्षा की गई. बैठक के दौरान रक्षा मंत्री ने स्पष्ट किया था कि सरकार देश के भीतर आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए हर जरूरी कदम उठा रही है.

रक्षामंत्री का कहना था कि कहा कि रसोई गैस (एलपीजी), पेट्रोल, डीजल और किसानों के लिए उर्वरकों की आपूर्ति लगातार बनाए रखने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है. इसके साथ ही देशभर में आवश्यक वस्तुओं की सप्लाई को सुचारु रखने के लिए प्रभावी व्यवस्थाएं की जा रही हैं, ताकि आम जनता को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े. उन्होंने यह भी बताया था कि सरकार संभावित संकटों से निपटने के लिए पहले से ही तैयारियों को मजबूत कर रही है. उनका कहना था कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए सतत निगरानी और समयानुसार निर्णय लेना बेहद जरूरी है.

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