Automobile Desk : सड़कों पर रात के वक्त सामने से आ रही गाड़ियों की तेज रोशनी (हाई बीम) के कारण होने वाली दुर्घटनाओं पर लगाम लगाने के लिए केंद्र सरकार सख्त कदम उठाने जा रही है। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) हेडलाइट्स से जुड़े नियमों में बड़े बदलाव की योजना बना रहा है। इस प्रस्तावित ड्राफ्ट के तहत वाहनों की हेडलाइट्स की ब्राइटनेस, कलर टेम्परेचर और हाई बीम के इस्तेमाल से जुड़े मानकों में अहम संशोधन किए जाएंगे। मंत्रालय ने इस संबंध में 30 दिनों के भीतर आम जनता और ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री से सुझाव व आपत्तियां मांगी हैं। यदि सब कुछ तय योजना के मुताबिक रहा, तो नए नियम अप्रैल 2027 से प्रभाव में आ सकते हैं।

नए प्रस्ताव के तहत 60 किलोमीटर प्रति घंटे से कम की रफ्तार पर हाई बीम का इस्तेमाल करने पर गाड़ियों में अलार्म बजने की व्यवस्था की जाएगी। ठीक उसी तरह जैसे सीटबेल्ट न लगाने या तय स्पीड लिमिट से ऊपर जाने पर चेतावनी की घंटी बजती है। हालांकि, 60 किमी प्रति घंटे से अधिक की रफ्तार पर (जैसे राष्ट्रीय राजमार्गों या एक्सप्रेसवे पर) यह अलार्म सिस्टम काम नहीं करेगा।

दोपहिया वाहनों के लिए ऑटोमैटिक हेडलैंप ऑन (AHO) सिस्टम में बदलाव का सुझाव दिया गया है। फिलहाल इंजन स्टार्ट होते ही दोपहिया की लाइटें अपने आप जल जाती हैं, लेकिन नए नियमों के लागू होने के बाद वाहन स्टार्ट होते ही लाइट हमेशा ‘लो-बीम’ मोड पर ही ऑन होगी। ड्राइवर को जरूरत महसूस होने पर ही इसे मैन्युअली हाई बीम पर शिफ्ट करना होगा। यह व्यवस्था केवल नए बनने वाले वाहनों के लिए अनिवार्य होगी, जबकि पुराने वाहनों के मौजूदा सिस्टम में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। सरकार इस नई तकनीक को लागू करने के लिए वाहन निर्माता कंपनियों के साथ लगातार चर्चा कर रही है ताकि उत्पादन स्तर पर आवश्यक तकनीकी बदलाव किए जा सकें।

रोशनी के स्तर और तीव्रता को नियंत्रित करने के लिए कैंडेला लिमिट तय करने की सिफारिश की गई है। दोपहिया वाहनों के लिए अधिकतम तीव्रता 1.5 लाख कैंडेला से घटाकर 1 लाख कैंडेला और चार पहिया वाहनों (कारों) के लिए 2.25 लाख कैंडेला से घटाकर 1.5 लाख कैंडेला करने का प्रस्ताव है। अत्यधिक चमकदार नीली-सफेद रोशनी से आँखों पर पड़ने वाले ‘ग्लेयर इफेक्ट’ को रोकने के लिए हेडलाइट का कलर टेम्परेचर अधिकतम 6,500 केल्विन (Kelvin) तक सीमित रहेगा। आँखों के विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से चालकों की आँखों पर पड़ने वाला तनाव कम होगा और रात में दृश्यता बेहतर होगी। इसके साथ ही, कोहरे और अंधेरे में भारी वाहनों तथा बसों की दृश्यता बढ़ाने के लिए रिफ्लेक्टिव सेफ्टी टेप लगाना अनिवार्य किया जाएगा।

सड़कों पर बेवजह हाई बीम का प्रयोग करने वाले चालकों के खिलाफ ट्रैफिक पुलिस सख्त रुख अपनाएगी। नियमों का उल्लंघन करने पर पहली बार में 500 रुपये और बार-बार गलती दोहराने पर 1,500 रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। गंभीर मामलों में या दुर्घटना का कारण बनने पर ड्राइवर का ड्राइविंग लाइसेंस भी सस्पेंड किया जा सकता है।

आमतौर पर हाई बीम का इस्तेमाल केवल बेहद अंधेरे या सुनसान रास्तों पर, जहां दूर तक कोई रोशनी न हो, या चौड़े डिवाइडर वाले हाईवे पर किया जाना चाहिए। वहीं, घनी आबादी वाले शहरी इलाकों, सामने से आ रहे वाहनों के दौरान और कोहरे या भारी बारिश के वक्त हाई बीम का उपयोग खतरनाक माना जाता है क्योंकि इससे रोशनी परावर्तित होकर चालक की अपनी ही आँखों के सामने धुंधलापन पैदा करती है।