Assam Man Fails Prove Indian Citizenship: 1951 एनआरसी की कॉपी, 1966 का दादा-दादी का वोटर कार्ड, भूमि खरीद रसीद, खुद का पैन कार्ड, वोटर कार्ड समेत 15 भारतीय आईडी प्रूफ देने के बावजूद शख्स खुद को भारतीय नागरिकता साबित नहीं कर पाया। अब गुवाहाटी हाईकोर्ट (Gauhati High Court) ने फॉरेनर्स ट्रिब्यूनल के फैसले को बरकरार रखते हुए उसे विदेशी घोषित किया है। मामला देश के पूर्वोत्तर राज्य असम का है। याचिकाकर्ता एक दिहाड़ी मजदूर है। वह पिछले 60 वर्षों से असम में रह रहा है।
एक बार फिर असम में नागरिकता साबित करने का मामला सुर्खियों में है। गुवाहाटी हाईकोर्ट ने शख्स के उन 15 दस्तावेजों को पर्याप्त नहीं मानते हुए उसकी अर्जी खारिज कर दी शख्स ने अपनी भारतीय नागरिकता साबित करने के लिए 15 दस्तावेज पेश किए थे। इसके बावजूद वह अपनी नागरिकता साबित नहीं कर पाया।
जस्टिस कल्याण राय सुराना और जस्टिस शमीमा जहां की बेंच ने कहा कि याचिकाकर्ता विदेशी अधिनियम 1946 की धारा 9 के तहत अपनी भारतीय नागरिकता साबित नहीं कर सका।इस धारा के मुताबिक, जिस व्यक्ति पर विदेशी होने का आरोप लगता है, उसे खुद को भारतीय नागरिक साबित करना होता है। याचिकाकर्ता ऐसा करने में असफल रहा।
स्कूल सर्टिफिकेट से PAN, EPIC तक सब रिजेक्ट
शख्स ने भारतीय नागरिक साबित करने के लिए स्कूल सर्टिफिकेट, पैन कार्ड, वोटर आईडी कार्ड समेत तमाम सबूत पेश किए। मगर कोर्ट ने एक को भी नहीं माना और उसे विदेशी घोषित कर दिया। कोर्ट ने उसके (याचिकाकर्ता) पैन कार्ड और वोटर कार्ड को लेकर कहा कि इससे नागरिकता प्रमाणित नहीं होता। कोर्ट ने उसके स्कूल सर्टिफिकेट, जमीन के दस्तावेज, 1951 के एनआरसी दस्तावेज को भी खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि इसमें जो मेंशन किया गया था, वह कानूनन सही नहीं था।
पिता की गवाही को भी कोर्ट ने नहीं माना
अदालत ने पिता की गवाही को भी नहीं माना। कोर्ट ने कहा कि नागरिकता साबित करने जैसे मामलों में मौखिक गवाही पर भरोसा नहीं किया जा सकता। यह रिकॉर्ड से साबित होना चाहिए। याचिकाकर्ता के कुछ डॉक्यूमेंट में पिता के डेट ऑफ बर्थ में गलती थी तो वहीं उनके कुछ वोटर आईडी कार्ड में उनका नाम सही नहीं था। अलग-अलग दस्तावेजों में उनके पिता और दादा के नामों में कुछ मामूली गलती के कारण कोर्ट ने उन्हें विदेशी घोषित कर दिया।
1988 में असम के घुगुदोबा में हुआ था जन्म
याचिकाकर्ता का जन्म 1 मई 1988 को असम के घुगुदोबा में हुआ था। उनका लालन-पालन भी वहीं हुआ। बाद में वे हाश्दोबा चले गए। उनके परिवार का नाम वोटर लिस्ट में लगातार दर्ज है। दस्तावेजों में उनके पिता, माता और दादा के नाम की स्पेलिंग अलग-अलग लिखी हुई है, लेकिन वे सभी एक ही व्यक्ति को ही इंगित करते हैं इसलिए इससे उनके भारतीय होने के दावे पर कोई डाउट नहीं होना चाहिए।
नागरिकता साबित करने के लिए शख्स ने दिए 15 सबूत
- याचिकाकर्ता के पिता, दादा-दादी और परिवार के अन्य सदस्यों के नाम पर 1951 के एनआरसी की कॉपी
- याचिकाकर्ता के पिता के 1951 के एनआरसी की कॉपी
- याचिकाकर्ता के दादा-दादी के नाम पर 1966 की वोटर लिस्ट की कॉपी
- याचिकाकर्ता के पिता, दादा-दादी और परिवार के अन्य सदस्यों के नाम पर साल 1970 की वोटर लिस्ट की कॉपी
- याचिकाकर्ता के दादा के नाम पर दिनांक 12.09.1973 को जारी मूल भूमि खरीद विलेख
- याचिकाकर्ता के माता-पिता, दादा-दादी और परिवार के अन्य सदस्यों के नाम पर साल 1979 की वोटर लिस्ट की कॉपी
- याचिकाकर्ता के माता-पिता और परिवार के अन्य सदस्यों के नाम पर 1985 की वोटर लिस्ट की कॉपी
- याचिकाकर्ता के माता-पिता, चाचा और परिवार के अन्य सदस्यों के नाम पर साल 1989 की वोटर लिस्ट की कॉपी
- याचिकाकर्ता के माता-पिता और बड़े भाई के नाम पर साल 1997 की वोटर लिस्ट की कॉपी
- याचिकाकर्ता के माता-पिता और परिवार के अन्य सदस्यों के नाम पर साल 2005 की वोटर लिस्ट की कॉपी
- याचिकाकर्ता के माता-पिता और परिवार के अन्य सदस्यों के नाम पर साल 2013 की वोटर लिस्ट की कॉपी
- याचिकाकर्ता के माता-पिता और परिवार के अन्य सदस्यों के नाम पर साल 2015 की वोटर लिस्ट की कॉपी
- 2017 का हाश्दोबा आंचलिक हाई स्कूल का सर्टिफिकेट
- याचिकाकर्ता का EPIC
- याचिकाकर्ता का पैन कार्ड
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