Dharm Desk – इस वर्ष ज्येष्ठ अधिकमास या मलमास के चलते धार्मिक और सामाजिक गतिविधियों पर विशेष प्रभाव देखने को मिला रहा हैं. 17 मई से शुरू हुआ यह अतिरिक्त मास 15 जून को समाप्त होने जा रहा है. जिसके बाद एक बार फिर से मांगलिक कार्यों की शुरुआत हो जाएगी. जैसे-जैसे समापन की तिथि नजदीक आ रही है. श्रद्धालुओं और परिवारों में शुभ कार्यों की तैयारियों को लेकर उत्साह बढ़ता जा रहा है.

अधिक मास को एक पवित्र किंतु निष्क्रिय अवधि मानी जाती है. जिसमें मांगलिक कार्यों की तुलना में आध्यात्मिक साधना, दान-पुण्य और व्रत-उपवास को अधिक महत्व दिया जाता है. यही कारण है कि इस एक माह में विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन, जनेऊ संस्कार और नए व्यापार की शुरुआत जैसे कार्यों को स्थगित रखने की परंपरा है. इसे अशुभ नहीं बल्कि आत्मिक उन्नति का अवसर माना जाता है.

जून और जुलाई में केवल 17 दिन ही वैवाहिक शुभ मुहूर्त

ज्येष्ठ अधिकमास के समापन के बाद 17 जून से पुनः मांगलिक कार्यों का शुभारंभ होगा. लेकिन जून और जुलाई में विवाह के लिए सीमित मुहूर्त उपलब्ध रहेंगे. ज्योतिषाचार्यों के अनुसार दोनों महीनों को मिलाकर केवल 17 दिन ही विवाह के लिए शुभ माने गए हैं. जून में 19 से 30 जून तक कई तिथियों पर विवाह लग्न बन रहे हैं, जबकि जुलाई में 1, 2, 6, 7, 8 और 11 जुलाई को विवाह के अवसर हैं.

अधिक मास की अमावस्या पर सिद्ध योग

ज्येष्ठ अधिकमास की अमावस्या 15 जून को मनाई जाएगी. इस दौरान 14 जून को श्राद्ध अमावस्या रहेगी. पंचांग के अनुसार अमावस्या तिथि 14 जून को दिन में 11.14 बजे से प्रारंभ होकर 15 जून को प्रातः 08.46 बजे समाप्त होगी. इस अवधि में रोहिणी धृति योग और मृगशिरा नक्षत्र के साथ सर्वार्थ अमृत सिद्धि योग का संयोग बन रहा है, जिसे अत्यंत शुभ माना जाता है.

अधिकमास के कारण प्रमुख त्योहारों का क्रम भी हुआ प्रभावित

अधिकमास के कारण इस वर्ष हिंदू पंचांग में लगभग 13 महीनों का विस्तार हो गया है. जिससे पूरे वर्ष के प्रमुख त्योहारों का क्रम प्रभावित हुआ है. रक्षाबंधन, गणेश चतुर्थी, पितृपक्ष, नवरात्रि, दीपावली और छठ महापर्व जैसी तिथियां पिछले वर्षों की तुलना में लगभग 15 से 20 दिन आगे खिसक गई है.