पटना। ​बिहार की राजनीति में बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव के दौरान एक नया और बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। चुनाव प्रचार और चुनावी गहमागहमी के बीच जन सुराज पार्टी ने पटना पुलिस प्रशासन पर गंभीर और तीखे आरोप लगाए हैं। पार्टी का सीधा दावा है कि पुलिस उपचुनाव के माहौल को प्रभावित करने के लिए उनकी पार्टी के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं पर बेवजह दबाव बना रही है और उन्हें लगातार परेशान किया जा रहा है।

​पुलिस छापेमारी और होटलों की निगरानी का आरोप

​जन सुराज पार्टी की ओर से साझा की गई जानकारी के मुताबिक, पुलिस ने चुनावी प्रक्रिया के बीच उनके पार्टी कार्यालयों, कार्यकर्ताओं के ठिकानों और संबंधित होटलों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की। पार्टी नेताओं का कहना है कि यह प्रशासनिक कार्रवाई सामान्य कानून-व्यवस्था का हिस्सा नहीं है, बल्कि इसके पीछे राजनीतिक दुर्भावना और सत्ताधारी दबाव काम कर रहा है।

​फोन कॉल से शुरू हुआ सिलसिला और दस्तावेजों की मांग

​इस पूरे विवाद को विस्तार से रखते हुए जन सुराज के प्रदेश सचिव रवि नारायण सिंह ने प्रेस के सामने अपना पक्ष रखा। उन्होंने बताया कि इस पूरी कार्रवाई की शुरुआत पुलिस के एक विशेष प्रकोष्ठ यानी स्पेशल सेल के फोन कॉल से हुई थी।

  • ​पहला कदम: स्पेशल सेल के अधिकारियों ने फोन करके पार्टी से जुड़ी गोपनीय और विस्तृत जानकारियां मांगनी शुरू कीं।
  • ​दूसरा कदम: इसके बाद पुलिस ने पार्टी से जुड़े होटलों के विवरण और पुराने गेस्ट रजिस्टर तत्काल प्रभाव से उपलब्ध कराने का सख्त निर्देश दिया।

​समय मांगने के बावजूद मिली धमकी

​रवि नारायण सिंह ने अपनी सफाई में स्पष्ट किया कि मांगे गए पुराने गेस्ट रजिस्टर और दस्तावेज उनके पुराने कार्यालय में सुरक्षित रखे हुए थे। अचानक मांग किए जाने के कारण वे उन दस्तावेजों को तुरंत मौके पर पेश नहीं कर सके।
​पार्टी पदाधिकारियों ने पुलिस के समक्ष अपनी मजबूरी रखते हुए रिकॉर्ड और दस्तावेज सौंपने के लिए 10 दिन का समय मांगा था। साथ ही यह पूरा भरोसा भी दिलाया गया था कि तय सीमा के भीतर सभी जरूरी कागजात पुलिस को सौंप दिए जाएंगे।
​लेकिन, पार्टी का आरोप है कि पुलिस ने इस तार्किक मांग को पूरी तरह दरकिनार कर दिया। इसके विपरीत, पुलिस अधिकारियों ने कथित तौर पर होटल को तुरंत सील करने और पदाधिकारियों को जेल भेजने की खुली चेतावनी तक दे डाली।

​लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर असर डालने की कोशिश

​जन सुराज पार्टी ने इस पूरी घटना को बांकीपुर उपचुनाव की लोकतांत्रिक प्रक्रिया को सीधे तौर पर प्रभावित करने की एक सोची-समझी कोशिश करार दिया है। पार्टी का मानना है कि इस तरह की प्रशासनिक कार्रवाइयों से विपक्षी दलों और नए राजनीतिक विकल्पों का मनोबल गिराने का प्रयास किया जा रहा है ताकि चुनावी मैदान में निष्पक्षता बाधित हो सके।

​पटना पुलिस का पक्ष आना बाकी

​इस पूरे हाई-प्रोफाइल मामले पर फिलहाल पटना पुलिस प्रशासन की तरफ से कोई भी विस्तृत या आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। पुलिस के आधिकारिक बयान के आने के बाद ही इस पूरे घटनाक्रम की असलियत और स्पष्ट तस्वीर सामने आ सकेगी। तब तक इस घटना ने बिहार के राजनीतिक गलियारों में एक नई बहस छेड़ दी है और हर तरफ इसी की चर्चा हो रही है।