अतीश दीपंकर/ भागलपुर। छात्र-नौजवानों के ‘बिहार बंद’ के आह्वान पर भागलपुर में युवा सड़कों पर उतर आए। प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। इस दौरान छात्रों ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की जोरदार मांग दोहराई। प्रदर्शन कर रहे युवाओं का कहना था कि देश की राजधानी दिल्ली से लेकर पटना तक शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पुलिस द्वारा जो बर्बर दमन किया जा रहा है, वह पूरी तरह से अन्यायपूर्ण है।
प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांगें
तिलकामांझी चौक पर अड़े छात्रों और नौजवानों ने प्रशासन के सामने अपनी प्रमुख मांगें रखीं, जिनमें मुख्य रूप से शामिल हैं:
- दमनकारी कार्रवाई पर रोक: दिल्ली और पटना में छात्रों पर लाठीचार्ज करने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
- फर्जी मुकदमे वापस हों: छात्रों पर थोपे गए सभी फर्जी मुदमों को तुरंत वापस लिया जाए।
- गिरफ्तार छात्रों की रिहाई: आंदोलन के दौरान गिरफ्तार किए गए सभी युवाओं को अविलंब रिहा किया जाए।
- नीट पेपर लीक पर न्याय: नीट परीक्षा धांधली और पेपर लीक मामले में संलिप्त दोषियों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
तिलकामांझी चौक पर दिखा उग्र रूप
’बिहार बंद’ को सफल बनाने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए जिला प्रशासन और पुलिस पहले से ही अलर्ट मोड पर थी। शहर के चप्पे-चप्पे पर भारी पुलिस बल की तैनाती की गई थी। इसके बावजूद, प्रदर्शन के दौरान तिलकामांझी चौक पर स्थिति तनावपूर्ण हो गई।
गुस्साए छात्रों ने पुलिस बल पर पथराव शुरू कर दिया और चौक पर खड़े पुलिस के वज्रवाहन सहित कई अन्य वाहनों में जमकर तोड़फोड़ की। वाहनों के क्षतिग्रस्त होने से अफरा-तफरी का माहौल बन गया। उग्र भीड़ को तितर-बितर करने के लिए अंततः पुलिस को लाठीचार्ज का सहारा लेना पड़ा। इस भारी बवाल और तनाव की स्थिति को देखते हुए जिला कलेक्टर (DM) और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) ने खुद मौके पर पहुंचकर मोर्चा संभाला और पुलिस बल के साथ मिलकर खदेड़ते हुए स्थिति को नियंत्रित किया।


