कुंदन कुमार, पटना। बिहार की राजधानी पटना में गंगा और पुनपुन नदी का जलस्तर लगातार बढ़ने से हालात गंभीर होते जा रहे हैं। गंगा ने गांधी घाट पर 10 साल पुराना रिकॉर्ड तोड़ दिया है, जबकि पुनपुन नदी खतरे के निशान से करीब 2.75 मीटर ऊपर बह रही है। नदियों के बढ़ते जलस्तर का असर अब पटना के गांवों और शहर के दक्षिणी इलाकों में साफ दिखाई देने लगा है। कई जगह सुरक्षा बांध टूट गए हैं, तो कई स्थानों पर पानी ओवरफ्लो होकर रिहायशी इलाकों में घुस गया है। इससे दक्षिण पटना का बड़ा हिस्सा जलमग्न हो गया है।
गांधी घाट पर टूटा 10 साल पुराना रिकॉर्ड
कल शनिवार देर रात गांधी घाट पर गंगा का जलस्तर 50.57 मीटर पहुंच गया। इससे पहले वर्ष 2016 में यहां गंगा का अधिकतम जलस्तर 50.52 मीटर दर्ज किया गया था। इस तरह गंगा ने करीब एक दशक पुराना रिकॉर्ड तोड़ दिया है। जलस्तर बढ़ने से गंगा के आसपास के निचले इलाकों में रहने वाले लोगों की चिंता भी बढ़ गई है।
पुनपुन के बढ़ते पानी से दक्षिण पटना में संकट
वहीं, पुनपुन नदी भी खतरे के निशान से 2.75 मीटर ऊपर बह रही है। नदी के बढ़ते दबाव के कारण पटना के दक्षिणी हिस्से में कई जगह सुरक्षा बांध टूट गए हैं। कुछ इलाकों में बांध के ऊपर से पानी बहने लगा है। इसके चलते आसपास के गांवों और रिहायशी इलाकों में तेजी से पानी फैल रहा है।
पटना-गया रेलखंड और NH पर चढ़ा पानी
बाढ़ के पानी का असर अब सड़क और रेल यातायात पर भी पड़ने लगा है। पटना-गया रेलखंड और मोकामा एनएच पर कई जगह पानी चढ़ गया है। इससे यातायात प्रभावित हुआ है। एहतियात के तौर पर आज रविवार को इस रूट की 10 पैसेंजर मेमू ट्रेनों को रद्द किया गया है। फिलहाल पटना-गया रेलखंड पर ट्रेनों का परिचालन एक ही तरफ से किया जा रहा है। लगातार बढ़ते जलस्तर को देखते हुए आने वाले समय में स्थिति और चुनौतीपूर्ण होने की आशंका है।
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