पटना। बिहार इस समय भीषण बाढ़ की चपेट में है। राज्य के 16 जिलों में बाढ़ से जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है और लगभग 5 लाख लोग इसकी मार झेल रहे हैं। गंगा समेत आठ प्रमुख नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं, जिससे निचले इलाकों में पानी भर गया है और कई क्षेत्रों का जिला मुख्यालयों से संपर्क टूट चुका है। लगातार बढ़ते जलस्तर ने प्रशासन की नींद उड़ा दी है।

​पटना में रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच सकता है गंगा का पानी

​राजधानी पटना में गंगा नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। आपदा प्रबंधन विभाग के अनुसार, पटना के गांधी घाट और हाथीदह में गंगा का जलस्तर इस बार अब तक के सबसे ऊंचे बाढ़ स्तर (हाइएस्ट फ्लड लेवल) को पार कर सकता है। गांधी घाट पर शुक्रवार को जलस्तर 50.34 मीटर दर्ज किया गया, जो साल 2016 के 52.52 मीटर के रिकॉर्ड स्तर से केवल 2.18 मीटर नीचे है। गंगा के बढ़ते पानी का असर पटना के दक्षिणी हिस्से की पुनपुन और दरधा नदियों पर भी साफ दिख रहा है, जहां बैकवाटर के दबाव से स्थिति और गंभीर हो गई है। प्रशासन ने मुख्य सुरक्षा बांधों पर निगरानी बढ़ा दी है और अधिकारियों को चौबीस घंटे मुस्तैद रहने के निर्देश दिए गए हैं।

​नदियां उफान पर, आधारभूत ढांचा तबाह

​राज्य के विभिन्न हिस्सों से भारी तबाही की खबरें सामने आ रही हैं। मुंगेर जिले के महाने नदी पर बरसंडा में बना डायवर्सन तेज बहाव में बह गया है, जिससे आवागमन ठप हो गया है। बांका जिले में हल्की बारिश के बाद ही ओढ़नी डैम की सड़क धंस गई, जो निर्माण कार्य की पोल खोलती है। पटना के फतुहा में श्मशान घाट पूरी तरह डूब चुके हैं, जिसके कारण लोगों को मजबूरन सड़कों के किनारे अंतिम संस्कार करना पड़ रहा है। बेगूसराय में शाम्हो-सूर्यगढ़ा सड़क पर पानी भरने से मुख्य संपर्क कट गया है। खगड़िया में बाढ़ के पानी में डूबने से एक व्यक्ति की मौत की भी पुष्टि हुई है, जबकि भागलपुर के नवगछिया अनुमंडल के राघोपुर इलाके में गंगा का कहर जारी है।

​नेपाल का पानी और बैराजों से रिसाव ने बढ़ाई मुश्किलें

​बिहार में इस प्राकृतिक आपदा के पीछे पड़ोसी देश नेपाल में हुई मूसलाधार बारिश का बड़ा हाथ है, जिसके कारण गंडक और कोसी नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ा है। इसके प्रभाव से दियारा क्षेत्रों में पानी फैल गया है। इसके अलावा, सोन नदी पर बने इंद्रपुरी बराज से करीब पांच लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने के कारण निचले इलाकों में बाढ़ का पानी तेजी से फैल गया है। हजारों लोग अपने घरों से विस्थापित हो चुके हैं और सुरक्षित ठिकानों की तलाश कर रहे हैं। आपदा प्रबंधन विभाग ने सभी प्रभावित जिलों के जिलाधिकारियों को हाई अलर्ट पर रहने का आदेश दिया है।

​मौसम विभाग की चेतावनी और राहत के प्रयास

​एक तरफ बाढ़ का तांडव जारी है, तो दूसरी तरफ मौसम विभाग ने राहत के बजाय और मुश्किलें बढ़ाने वाली भविष्यवाणी की है। मौसम विभाग के अनुसार, पश्चिमी चंपारण, पूर्वी चंपारण, सीवान, सारण और गोपालगंज में तेज बारिश की संभावना है। हालांकि, पटना और अन्य जिलों में मौसम सामान्य रहने की उम्मीद है, लेकिन लोगों को उमस भरी गर्मी का सामना करना पड़ेगा। विस्थापित हुए लोगों के लिए राहत शिविरों की व्यवस्था और प्रशासनिक मशीनरी को मुस्तैद करने का दावा किया जा रहा है, ताकि इस आपदा से किसी तरह निपटा जा सके।