भुवनेश्वर। ओडिशा में राज्यसभा चुनाव के दौरान कथित क्रॉस वोटिंग को लेकर बीजू जनता दल (BJD) ने अब कानूनी लड़ाई तेज कर दी है। पार्टी ने अपने आठ विधायकों के खिलाफ दायर अयोग्यता याचिका को खारिज किए जाने के विधानसभा अध्यक्ष के फैसले को उड़ीसा हाईकोर्ट में चुनौती दी है।

BJD की मुख्य सचेतक और वरिष्ठ विधायक प्रमिला मलिक ने शुक्रवार को बताया कि पार्टी ने गुरुवार को हाईकोर्ट में रिट याचिका दाखिल की। उनका आरोप है कि विधानसभा अध्यक्ष सुरमा पाढ़ी ने BJD का पक्ष सुने बिना ही अयोग्यता याचिका पर एकतरफा फैसला लिया।

प्रमिला मलिक ने कहा कि पार्टी ने आठ विधायकों के खिलाफ पार्टी विरोधी गतिविधियों और सामूहिक निर्णय की अवहेलना का आरोप लगाते हुए उनकी सदस्यता रद्द करने की मांग की थी। उनका कहना है कि इस मामले में पार्टी को अपना पक्ष रखने का उचित अवसर नहीं दिया गया।

व्हिप लागू होने को लेकर BJD ने साफ किया रुख

BJD विधायक और पूर्व मंत्री अरुण कुमार साहू ने मामले में पार्टी का पक्ष स्पष्ट करते हुए कहा कि BJD को इस बात की जानकारी थी कि राज्यसभा चुनाव में पार्टी व्हिप लागू करने का कोई कानूनी प्रावधान नहीं है। ऐसे चुनाव में विधायक अपनी अंतरात्मा के आधार पर मतदान करने के लिए स्वतंत्र होते हैं।

हालांकि, पार्टी का आरोप है कि संबंधित विधायकों ने राज्यसभा चुनाव से ठीक पहले बुलाई गई महत्वपूर्ण और आपातकालीन बैठकों से दूरी बनाई और पार्टी के आधिकारिक निर्देशों की अनदेखी की। BJD ने इसी आधार पर उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

जून में स्पीकर ने खारिज कर दी थी याचिका

इस मामले में विधानसभा अध्यक्ष ने इस साल जून में BJD और कांग्रेस की ओर से दायर अयोग्यता याचिकाओं को खारिज कर दिया था। BJD ने अपने आठ विधायकों, जबकि कांग्रेस ने अपने तीन विधायकों के खिलाफ अयोग्यता की कार्रवाई की मांग की थी।

19 जून को जारी विधानसभा सचिवालय की अधिसूचना में कहा गया था कि BJD की ओर से दायर याचिकाएं अस्पष्ट और अपर्याप्त थीं तथा उनमें पर्याप्त ठोस सबूत नहीं दिए गए थे। अधिसूचना के मुताबिक, याचिकाएं ओडिशा विधानसभा (दल-बदल के आधार पर अयोग्यता) नियम, 1987 में निर्धारित अनिवार्य वैधानिक प्रावधानों और सत्यापन प्रक्रिया के अनुरूप भी नहीं थीं।

इन विधायकों पर लगाए गए थे आरोप

BJD ने चक्रमाणी कन्हार, देवी रंजन त्रिपाठी, अरविंद महापात्र, सनातन महाकुड़, सुबासिनी जेना, नबा किशोर मलिक और सौविक बिस्वाल समेत कुल आठ विधायकों के खिलाफ अयोग्यता की मांग की थी।

पार्टी का आरोप था कि इन विधायकों का आचरण संविधान की 10वीं अनुसूची, यानी दल-बदल विरोधी कानून के प्रावधानों के दायरे में आता है।

वहीं, कांग्रेस ने सोफिया फिरदौस, रमेश जेना और दशरथ गमांग के खिलाफ अयोग्यता की मांग की थी। कांग्रेस की याचिकाएं भी विधानसभा अध्यक्ष ने खारिज कर दी थीं।

16 मार्च के राज्यसभा चुनाव से जुड़ा है विवाद

पूरा विवाद ओडिशा की चार राज्यसभा सीटों के लिए 16 मार्च को हुए चुनाव से जुड़ा है। BJD ने कांग्रेस और CPI(M) के साथ मिलकर प्रसिद्ध मूत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. दत्तेश्वर होता को संयुक्त विपक्षी उम्मीदवार बनाया था।

हालांकि चुनाव के दौरान विपक्षी खेमे में कथित क्रॉस वोटिंग के चलते डॉ. होता चुनाव हार गए। इसके बाद भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार और पूर्व केंद्रीय मंत्री दिलीप राय ने जीत दर्ज की।

राज्यसभा चुनाव के नतीजों के बाद BJD ने अपने कुछ विधायकों के खिलाफ पार्टी लाइन से हटकर मतदान करने और पार्टी के सामूहिक निर्णय की अवहेलना करने के आरोप लगाए। विधानसभा अध्यक्ष के फैसले के बाद अब पार्टी ने हाईकोर्ट का रुख किया है। मामले में हाईकोर्ट की सुनवाई और आगे आने वाले फैसले पर राजनीतिक हलकों की नजर रहेगी।

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