दुर्गेश राजपूत, नर्मदापुरम। मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम में वन विभाग की बड़ी लापरवाही सामने आई है। जहां करीब डेढ़ महीने तक ब्रिटिश कालीन दस्तावेज खुले में पड़े रहे और खराब होते रहे। खबर की सूचना मिलते ही DFO गौरव शर्मा ने एक्शन लिया और कर्मचारियों को तत्काल कार्यालय बुलाकर खुले में बिखरे रिकॉर्ड्स को इकठ्ठा करवाया।
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नए भवन के निर्माण के लिए पुराने कार्यालय से दस्तावेज निकाले गए थे। लेकिन डिजिटलीकरण और संरक्षण के बजाय खुले में छोड़ दिया गया। ब्रिटिशकालीन 1942 से लेकर 2002 तक के बहुमूल्य वन दस्तावेज बीते डेढ़ महीने से खुले परिसर में खराब हो रहे थे।
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खुले में फेंके गए रिकॉर्ड्स में 1942 का ब्रिटिशकालीन, केस बुक, वन भूमि रिकॉर्ड और 1995 के कैश रजिस्टर शामिल हैं। अनुपयोगी बताने के बाद भी दस्तावेज डेढ़ महीने से नियमानुसार नष्ट नहीं किए गए थे। बारिश में भीग कर ये नष्ट होने की कगार पर पहुंच गए थे।
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दस्तावेजों को बारिश से बचाने के लिए पुराने भवन के बरामदे में रखकर पॉलीथिन से ढका गया। स्थानीय निवासियों और सेवानिवृत्त कर्मचारियों ने ऐतिहासिक महत्व के दस्तावेजों के डिजिटलीकरण और सुरक्षित रखरखाव की मांग की गई।
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