कश्मीर घाटी में कश्मीरी पंडितों की वापसी और पुनर्वास को लेकर एक कथित आतंकी प्रचार मंच ने नई धमकी जारी की है। रिपोर्ट के मुताबिक, ‘कश्मीर फाइट’ नामक पोर्टल पर 6 अगस्त को प्रकाशित एक धमकी भरे संदेश में कश्मीरी पंडित कर्मचारियों और उनकी मदद करने वालों को निशाना बनाने की बात कही गई है।

छह कश्मीरी पंडित कर्मचारियों की जानकारी साझा करने का दावा

धमकी में सरकारी विभागों में कार्यरत छह कश्मीरी पंडित कर्मचारियों की कथित निजी जानकारी साझा किए जाने की बात सामने आई है। इनमें प्रधानमंत्री पुनर्वास पैकेज के तहत नियुक्त कर्मचारियों को विशेष रूप से निशाना बनाने की धमकी दी गई है।

खुफिया एजेंसियों के अनुसार, निजी जानकारी सार्वजनिक करने का उद्देश्य कर्मचारियों में भय पैदा करना और उन्हें संभावित आतंकवादी निशाने के तौर पर चिन्हित करना हो सकता है। सुरक्षा कारणों से कर्मचारियों के नाम और संपर्क विवरण सार्वजनिक नहीं किए गए हैं।

लौट रहे पंडितों के खिलाफ हिंसा भड़काने की धमकी

इस दस्तावेज़ में कश्मीरी पंडितों को “सांप” बताया गया है और विशेष रूप से कार्यकर्ता राकेश ज्योत्शी का नाम लेते हुए उन पर और अन्य लोगों पर घाटी में समुदाय की वापसी को सुविधाजनक बनाने का प्रयास करने का आरोप लगाया गया है। इसमें स्थानीय निवासियों से कश्मीरी पंडितों के घरों को जलाने, उनकी खड़ी फसलों को नष्ट करने, उन्हें आश्रय देने से इनकार करने और जहां भी वे मिलें, उन्हें निशाना बनाने का आग्रह किया गया है। इसमें आगे कहा गया है कि समुदाय के सदस्यों की मदद करने वाले किसी भी व्यक्ति को सहयोगी माना जाएगा और उसके साथ “तदनुसार कार्रवाई की जाएगी।”

जम्मू जाने पर भी सुरक्षित नहीं होने की चेतावनी

धमकी में कश्मीरी पंडित कर्मचारियों को घाटी से जम्मू जाने के बाद भी निशाना बनाए जाने की बात कही गई है। साथ ही, प्रवासी कर्मचारियों के लिए घर से काम करने और दूरस्थ तैनाती जैसी प्रशासनिक सुविधाओं का विरोध किया गया है।

सुरक्षा एजेंसियों ने बढ़ाई निगरानी

खुफिया सूत्रों के अनुसार, आतंकी संगठन कथित तौर पर प्रॉक्सी या ‘शैडो फ्रंट’ के जरिए अपनी गतिविधियों को अंजाम देने की कोशिश करते हैं। एजेंसियों का आकलन है कि ऐसे प्रचार मंचों का इस्तेमाल मनोवैज्ञानिक दबाव और डर का माहौल बनाने के लिए किया जा सकता है।

धमकियों के मद्देनजर प्रवासी कश्मीरी पंडित कर्मचारियों की सुरक्षा बढ़ा दी गई है। उनके आवासों के आसपास निगरानी बढ़ाने के साथ सुरक्षित आवाजाही के इंतजाम किए जा रहे हैं। निजी जानकारी ऑनलाइन प्रसारित करने वाले आतंकी नेटवर्क और उनके मददगारों की पहचान के लिए भी खुफिया अभियान तेज किए गए हैं।

6,510 परिवारों में से केवल 3 ही परिवार लौट पाए

संसदी समिति की एक रिपोर्ट के मुताबिक, कश्मीर में माइग्रेंट 6,510 परिवारों ने अपने घरों को वापस लौटने की इच्छा जताई थी, लेकिन हैरान करने वाली बात ये है कि इनमें से सिर्फ 3 ही ऐसे परिवार हैं, जो घाटी में प्रॉपर तरीके से बस गए हैं। ऐसे में सरकार से उन वजहों को पता लगाने को कहा गया है, जिसकी वजह से बाकी के परिवार इच्छा जाहिर करने के बाद भी यहां वापस नहीं आ पा रहे हैं। इनमें सरकार से सिक्योरिटी, घर, रोजी-रोटी, एजुकेशन और सोशल चिंताओं का पूरा असेसमेंट करना भी शामिल है।

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