सिरसा। जिले में स्कूली बच्चों की सुरक्षा को लेकर प्रशासन पूरी तरह सख्त हो गया है। परिवहन और शिक्षा विभाग के बुलाने के बावजूद कई स्कूल संचालक अपने वाहनों की जांच करवाने के लिए पासिंग ग्राउंड नहीं पहुंचे। इसे प्रशासन ने बच्चों की जान के साथ खिलवाड़ माना है। अब विभाग ने कड़ा रुख अपनाते हुए सोमवार से सीधे स्कूलों के अंदर जाकर वाहनों की जांच करने का फैसला किया है।
दस्तावेजों में खामी की आशंका
प्रशासन को शक है कि कई स्कूलों के वाहनों के दस्तावेज पूरे नहीं हैं या उनमें बड़ी तकनीकी कमियां हैं। इसी डर से वाहन जांच के लिए नहीं लाए गए। विभाग का कहना है कि प्रशासन को गुमराह करने वालों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा। नियमों का पालन न करने पर वाहनों के चालान काटे जा रहे हैं। अभियान के तहत अब तक चार वाहनों और चालकों के खिलाफ कार्रवाई की जा चुकी है। रानियां इलाके में विशेष रूप से दौरा कर सभी वैन की जांच की जा रही है।
महिला कंडक्टर की शर्त से बढ़ी मुश्किलें
सरकार की नई सुरक्षा पॉलिसी के तहत स्कूल वाहनों में महिला कंडक्टर रखना अनिवार्य कर दिया गया है। जिन वाहनों में छात्राएं सफर करती हैं, उनमें महिला स्टाफ का होना जरूरी है। इसके साथ ही महिला का कंडक्टर लाइसेंस होना भी अनिवार्य है। इस नियम के बाद स्कूल संचालकों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। संचालकों का कहना है कि ग्रामीण इलाकों और लंबे रूटों पर महिला कंडक्टर आसानी से नहीं मिल पाती हैं, जिससे उन्हें नियमों का पालन करने में भारी परेशानी आ रही है।
पुलिस का कड़ा संदेश
ट्रैफिक थाना प्रभारी बलराज सिंह ने साफ कहा है कि जो स्कूल वाहन अभी तक जांच से बचे हैं, उनकी हर हाल में जांच की जाएगी। अकेले रानियां क्षेत्र में दर्जनों वाहन हैं, जिनकी कड़ी चेकिंग शुरू कर दी गई है।
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