Dharm Desk – ज्येष्ठ अधिकमास की विशेष एकादशी का व्रत अत्यंत पुण्य देने वाला है, लेकिन इस बार ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की परमा एकादशी को लेकर लोगों में तारीख का भ्रम बना हुआ है. दरअसल, अधिक मास में पड़ने वाली यह एकादशी बेहद दुर्लभ मानी जाती है, जो लगभग हर तीन साल में एक बार ही आती है. यही कारण है कि इसे सभी 24 एकादशियों में सबसे विशेष और फल दायी बताया गया है.

कब रखें व्रत?

द्रिक पंचांग के अनुसार, एकादशी तिथि 10 जून को रात 12:58 बजे शुरू होकर 11 जून को रात 10:37 बजे समाप्त होगी. उदया तिथि के आधार पर परमा एकादशी का व्रत 11 जून, गुरुवार को ही रखा जाएगा. इसलिए भक्तों को किसी भ्रम में पड़ने की जरूरत नहीं है और 11 जून को व्रत करना ही शास्त्र सम्मत माना जाएगा.

शुभ मुहूर्त और पारण का समय

इस दिन ब्रह्म मुहूर्त सुबह 04:02 से 04:42 तक रहेगा, जबकि पूजा के लिए उत्तम मुहूर्त 05:23 से 07:07 बजे तक है. अभिजीत मुहूर्त 11:53 से 12:49 बजे तक रहेगा. व्रत का पारण 12 जून को सुबह 05:23 से 08:10 बजे के बीच करना श्रेष्ठ होने वाला है.

क्यों खास है परमा एकादशी?

परमा एकादशी को ‘सर्वोच्च एकादशी’ कहा गया है. इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है. जीवन के सभी पापों से मुक्ति मिलती है. अधिक मास में आने के कारण इसका महत्व कई गुना बढ़ जाता है.

पौराणिक कथा देती है बड़ा संदेश

पुराणों के अनुसार, धन के देवता कुबेर ने इसी व्रत के प्रभाव से धनाध्यक्ष का पद प्राप्त किया था, वहीं सत्यवादी राजा हरिश्चंद्र ने भी परमा एकादशी का व्रत रखकर अपना खोया हुआ राज्य और परिवार वापस पाया था. यह कथा बताती है कि यह व्रत जीवन में खोई हुई खुशियों को वापस लाने की शक्ति रखता है.

व्रत रखने के लाभ

परमा एकादशी का व्रत मानसिक शांति, सकारात्मक ऊर्जा और आध्यात्मिक उन्नति प्रदान करता है. साथ ही यह व्रत आर्थिक समस्याओं को दूर करने और जीवन में सुख लाने वाला है. इसलिए इस विशेष संयोग में श्रद्धा और विधि-विधान से व्रत रखना अत्यंत लाभकारी बताया गया है.