राजधानी दिल्ली के बिजली उपभोक्ताओं को एक बार फिर महंगे बिजली बिल का झटका लग सकता है। दिल्ली विद्युत नियामक आयोग (DERC) ने बिजली खरीद समायोजन लागत यानी PPAC में बढ़ोतरी को मंजूरी दे दी है। इसके बाद बिजली कंपनियां आने वाले बिलों में उपभोक्ताओं से अतिरिक्त 7 से 8 फीसदी PPAC वसूल सकेंगी। बिजली कंपनियों की ओर से मौजूदा PPAC में बढ़ोतरी की मांग की गई थी। कंपनियों ने PPAC को बढ़ाकर 23 से 31 फीसदी तक करने का प्रस्ताव रखा था।
दरअसल, बीएसईएस राजधानी पावर लिमिटेड (BRPL) ने PPAC को बढ़ाकर 31.64 फीसदी, बीएसईएस यमुना पावर लिमिटेड (BYPL) ने 24.02 फीसदी और टाटा पावर दिल्ली डिस्ट्रीब्यूशन लिमिटेड (TPDDL) ने 23.71 फीसदी करने की मांग DERC के सामने रखी थी। मांग पर विचार करने के बाद नियामक आयोग ने तीनों डिस्कॉम के लिए अलग-अलग PPAC बढ़ोतरी को मंजूरी दी है। इसके तहत BRPL को 7.94 फीसदी, BYPL को 7.43 फीसदी और TPDDL को 8.50 फीसदी PPAC बढ़ाने की अनुमति दी गई है।
इस बढ़ोतरी के बाद अगले बिजली बिल में BRPL उपभोक्ताओं पर कुल 17.94 फीसदी, BYPL उपभोक्ताओं पर 17.43 फीसदी और TPDDL उपभोक्ताओं पर 18.50 फीसदी PPAC लागू होगा। इससे बिजली बिल की कुल राशि बढ़ सकती है। बिजली कंपनियों का कहना है कि 200 यूनिट तक बिजली इस्तेमाल करने वाले उपभोक्ताओं पर इस बढ़ोतरी का ज्यादा बोझ नहीं पड़ेगा। हालांकि, अधिक बिजली खपत करने वाले उपभोक्ताओं के बिल पर PPAC बढ़ोतरी का असर अपेक्षाकृत ज्यादा दिखाई दे सकता है।
तीनों प्रमुख बिजली कंपनियों ने रखा था प्रस्ताव
पहले दिल्ली विद्युत नियामक आयोग (DERC) की ओर से हर तीन महीने में PPAC की समीक्षा की जाती थी। अब व्यवस्था में बदलाव करते हुए हर महीने PPAC की समीक्षा की जा रही है। इसी प्रक्रिया के तहत जुलाई में दिल्ली की तीनों प्रमुख बिजली वितरण कंपनियों ने DERC के सामने PPAC बढ़ाने का प्रस्ताव रखा था। बिजली कंपनियों ने आयोग को बताया था कि बिजली खरीद की लागत लगातार बढ़ रही है और उन्हें बिजली खरीदने के लिए पहले की तुलना में अधिक शुल्क का भुगतान करना पड़ रहा है। कंपनियों ने इसी अतिरिक्त खर्च की भरपाई के लिए PPAC बढ़ाने की अनुमति मांगी थी।
25 से 60 रुपये तक बढ़ सकता है बिजली बिल
PPAC में बढ़ोतरी का असर आने वाले बिजली बिलों में दिखाई देगा। सूत्रों के मुताबिक, इस फैसले के बाद उपभोक्ताओं के प्रत्येक बिल में करीब 25 से 60 रुपये तक की बढ़ोतरी हो सकती है। हालांकि, 200 यूनिट तक बिजली इस्तेमाल करने वाले उपभोक्ताओं पर इसका सीधा बोझ नहीं पड़ेगा, क्योंकि इस श्रेणी में बिजली बिल शून्य आने के कारण PPAC नहीं लगाया जाता है। गौरतलब है कि इससे पहले जून महीने में भी PPAC में बढ़ोतरी की गई थी। उस समय दिल्ली के ऊर्जा मंत्री आशीष सूद ने कहा था कि वैश्विक ईंधन लागत में बढ़ोतरी के बावजूद दिल्ली सरकार उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा सुनिश्चित करेगी।
कानूनी व्यवस्था है PPAC
ऊर्जा मंत्री ने स्पष्ट किया था कि बिजली खरीद समायोजन लागत यानी PPAC देश के बिजली कानूनों के तहत एक वैधानिक व्यवस्था है। यह कोई नई व्यवस्था नहीं है। इसके तहत बिजली वितरण कंपनियों को ईंधन और बिजली खरीद की लागत में होने वाले उतार-चढ़ाव के अनुसार हर महीने कीमतों में समायोजन करने की अनुमति मिलती है। उन्होंने कहा था कि पश्चिम एशिया संकट और अन्य अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के कारण वैश्विक ईंधन कीमतों में असाधारण बढ़ोतरी हुई है। ऐसे में बिजली खरीद की बढ़ी हुई लागत को समायोजित करने के लिए PPAC में बदलाव जरूरी हो गया है।
क्या है PPAC?
PPAC यानी Power Purchase Adjustment Cost वह अतिरिक्त शुल्क है, जो बिजली खरीद की लागत में होने वाले बदलाव की भरपाई के लिए उपभोक्ताओं से लिया जाता है। बिजली कंपनियों की खरीद लागत बढ़ने पर PPAC के जरिए उसका कुछ हिस्सा उपभोक्ताओं से वसूला जाता है।
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