दिल्ली हाई कोर्ट (Delhi High Court) ने यमुना नदी के बाढ़ क्षेत्र में बढ़ती गतिविधियों पर सख्त रुख अपनाते हुए अहम निर्देश जारी किए हैं। अदालत ने स्पष्ट कहा है कि इस संवेदनशील क्षेत्र में किसी भी तरह की पार्किंग, कमर्शियल गतिविधि या बड़े धार्मिक आयोजन की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। सुनवाई के दौरान अदालत ने DDA को निर्देश दिया कि वह यमुना के बाढ़ क्षेत्र की पर्यावरणीय संवेदनशीलता को देखते हुए इन इलाकों में सख्त निगरानी सुनिश्चित करे और किसी भी तरह के अतिक्रमण या अस्थायी व्यावसायिक गतिविधियों को रोके। अदालत ने कहा कि बाढ़ क्षेत्र प्राकृतिक जल प्रवाह और पारिस्थितिकी तंत्र के लिए बेहद महत्वपूर्ण होता है, इसलिए यहां किसी भी प्रकार की गतिविधि जो पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए, उसे गंभीरता से लिया जाएगा।
सुनवाई के दौरान जस्टिस जसमीत सिंह की अदालत ने कहा कि यमुना का बाढ़ क्षेत्र पर्यावरणीय दृष्टि से बेहद संवेदनशील है और यहां किसी भी प्रकार की व्यावसायिक या धार्मिक गतिविधियों को सीमित रखना जरूरी है। अदालत ने स्पष्ट किया कि पर्यावरण संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए और किसी भी स्थिति में नदी के प्राकृतिक प्रवाह और उसके आसपास के पारिस्थितिकी तंत्र को नुकसान नहीं पहुंचना चाहिए। कोर्ट ने यह भी संकेत दिया कि यदि इस क्षेत्र में अनियंत्रित गतिविधियां जारी रहती हैं, तो संबंधित एजेंसियों को सख्त कदम उठाने होंगे ताकि यमुना फ्लड प्लेन की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
अदालत ने कहा कि यदि किसी विशेष धार्मिक अवसर पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है और पार्किंग की आवश्यकता होती है, तो DDA को इसके लिए फ्लड प्लेन क्षेत्र के बाहर वैकल्पिक पार्किंग की व्यवस्था करनी होगी। कोर्ट ने साफ कहा कि श्रद्धालुओं की सुविधा के नाम पर यमुना किनारे के पर्यावरणीय रूप से संवेदनशील क्षेत्र का उपयोग किसी भी स्थिति में नहीं किया जा सकता। सुनवाई के दौरान अदालत ने दोहराया कि यमुना फ्लड प्लेन एक इकोलॉजिकली सेंसिटिव जोन है और यहां अनियंत्रित मानवीय गतिविधियां नदी के प्राकृतिक संतुलन को नुकसान पहुंचा सकती हैं।
क्या है मामला
यमुना के सुर घाट इलाके में पार्किंग स्थल के आवंटन को लेकर एक मामला सामने आया है। यह विवाद उस समय उठा जब याचिकाकर्ता सुरेश कुमार ने पार्किंग टेंडर प्रक्रिया को चुनौती दी। याचिका के अनुसार, MCD ने सितंबर 2022 में विभिन्न पार्किंग स्थलों के लिए टेंडर जारी किए थे, जिसमें यमुना के सुर घाट की पार्किंग साइट भी शामिल थी। याचिकाकर्ता का दावा है कि वह इस टेंडर में सबसे ऊंची बोली लगाने वाला व्यक्ति था। बोली स्वीकार होने के बाद उसने सिक्योरिटी मनी और एडवांस लाइसेंस फीस जमा की और जनवरी 2023 से वहां पार्किंग संचालन भी शुरू कर दिया। हालांकि बाद में इस पार्किंग संचालन और यमुना फ्लड प्लेन क्षेत्र के उपयोग को लेकर विवाद खड़ा हो गया, जिसके चलते मामला अदालत तक पहुंचा।
कमर्शिलय गतिविधियों की इजाजत नहीं
जानकारी के अनुसार, DDA ने MCD को केवल 2508 वर्ग मीटर जमीन ही हस्तांतरित की थी, जबकि MCD ने करीब 3780 वर्ग मीटर क्षेत्र को पार्किंग के लिए आवंटित कर दिया। DDA ने इस पर आपत्ति जताते हुए कहा कि संबंधित क्षेत्र यमुना फ्लड प्लेन के “जीरो जोन” में आता है, जहां किसी भी प्रकार की कमर्शियल गतिविधि की अनुमति नहीं दी जा सकती। इसके बाद DDA ने अपनी अनुमति वापस ले ली, और जनवरी 2025 में MCD ने पार्किंग का आवंटन रद्द कर दिया। इसी फैसले के खिलाफ याचिकाकर्ता सुरेश कुमार ने हाईकोर्ट का रुख किया और पार्किंग स्थल को दोबारा बहाल करने की मांग की।
सुनवाई के दौरान DDA ने हाईकोर्ट को बताया कि यमुना फ्लड प्लेन एक अत्यंत संवेदनशील पर्यावरणीय क्षेत्र है, जहां किसी भी प्रकार की व्यावसायिक गतिविधि पर्यावरणीय संतुलन के लिए खतरा बन सकती है। DDA ने यह भी तर्क दिया कि विकास और संरक्षण से जुड़े कार्यों को सुचारू रूप से आगे बढ़ाने के लिए इस क्षेत्र को अतिक्रमण और व्यावसायिक उपयोग से मुक्त करना आवश्यक है, ताकि नदी के प्राकृतिक प्रवाह और पारिस्थितिकी तंत्र की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
हाईकोर्ट ने यमुना फ्लड प्लेन से जुड़े पार्किंग विवाद में DDA की दलीलों को स्वीकार करते हुए याचिकाकर्ता की मांग खारिज कर दी है। अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता ने MCD के पार्किंग रद्द करने के आदेश को सीधे चुनौती नहीं दी थी, जो इस मामले में एक महत्वपूर्ण कानूनी पहलू था। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि मुआवजे या आवंटन रद्द करने से जुड़े विवाद तथ्यात्मक प्रकृति के हैं, जिनका निर्णय रिट याचिका के तहत नहीं किया जा सकता।हालांकि, अदालत ने याचिकाकर्ता को यह स्वतंत्रता दी कि यदि वह चाहे तो सिविल कोर्ट में जाकर मुआवजे या अन्य राहत के लिए अलग से कानूनी कार्रवाई कर सकता है।
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