स्वतंत्रता दिवस समारोह में देशभक्ति से सराबोर सांस्कृतिक प्रस्तुतियां, सवेरा स्कूल के विद्यार्थियों को किया सम्मानित

सोनीपत, 15 अगस्त 2026। दीनबंधु छोटू राम विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, मुरथल में शनिवार को 80वां स्वतंत्रता दिवस पूरे उत्साह, गरिमा और राष्ट्रभक्ति के माहौल में मनाया गया। कुलगुरु प्रो. प्रकाश सिंह ने ध्वजारोहण कर तिरंगे को सलामी दी। इस दौरान पूरा विश्वविद्यालय परिसर देशभक्ति के नारों और तिरंगे की शान से गूंज उठा। समारोह में विश्वविद्यालय के अधिकारी, शिक्षक, कर्मचारी, विद्यार्थी और गणमान्य नागरिक शामिल हुए।

समारोह में विद्यार्थियों ने देशभक्ति से ओत-प्रोत सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए। राष्ट्रभक्ति, भारतीय संस्कृति और राष्ट्रीय एकता पर आधारित गीत, नृत्य और अन्य प्रस्तुतियों ने सभी का मन मोह लिया। कार्यक्रम के अंत में कुलगुरु प्रो. प्रकाश सिंह ने उत्कृष्ट प्रस्तुति देने वाले सवेरा स्कूल के विद्यार्थियों को पुरस्कृत किया। सवेरा स्कूल के करीब 250 बच्चों को स्टेशनरी किट भी वितरित की गई। समारोह के समापन पर सभी उपस्थित लोगों को प्रसाद के रूप में लड्डू बांटे गए। विश्वविद्यालय में दो दिन पहले तिरंगा यात्रा भी आयोजित की गई थी, जिसमें विद्यार्थियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया था।

युवाओं से टेक्नोलॉजी के क्रिएटर बनने का आह्वान

अपने संबोधन में कुलगुरु प्रो. प्रकाश सिंह ने देशवासियों और विश्वविद्यालय परिवार को 80वें स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि यह दिन उन अमर शहीदों और स्वतंत्रता सेनानियों के त्याग, तपस्या और बलिदान को नमन करने का अवसर है, जिन्होंने देश की आजादी के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया। आज हम जिस स्वतंत्र वातावरण में सांस ले रहे हैं, वह अनगिनत बलिदानों का परिणाम है।

उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता का वास्तविक अर्थ तभी सार्थक होगा, जब भारत आत्मनिर्भर, शिक्षित, वैज्ञानिक दृष्टिकोण से समृद्ध और विश्व में सम्मान के साथ खड़ा हो। वर्ष 2047 तक विकसित भारत के निर्माण के संकल्प को पूरा करने में देश के युवाओं और विद्यार्थियों की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। आज के विद्यार्थी ही कल के वैज्ञानिक, इंजीनियर, शिक्षक, उद्यमी, प्रशासक और राष्ट्र निर्माता बनेंगे।

कुलगुरु ने विद्यार्थियों से कहा कि वे केवल नौकरी तलाशने वाले युवा न बनें, बल्कि रोजगार के अवसर पैदा करने वाले बनें। समस्याओं की शिकायत करने के बजाय उनके समाधान खोजने पर ध्यान दें। उन्होंने युवाओं से टेक्नोलॉजी के केवल उपभोक्ता बनने के बजाय उसके क्रिएटर बनने का आह्वान किया।

उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स, बायोटेक्नोलॉजी, सेमीकंडक्टर, साइबर सिक्योरिटी, स्पेस टेक्नोलॉजी, रिन्यूएबल एनर्जी और इलेक्ट्रिक व्हीकल जैसी उभरती तकनीकें भारत के विकास की नई दिशा तय करेंगी। विश्वविद्यालय विद्यार्थियों को इन क्षेत्रों के लिए तैयार करने की दिशा में लगातार काम कर रहा है।

ज्ञान के साथ चरित्र निर्माण भी जरूरी

कुलगुरु ने विद्यार्थियों से अपने जीवन में बड़ा लक्ष्य निर्धारित करने और जिस भी क्षेत्र में जाएं, वहां उत्कृष्टता हासिल करने का प्रयास करने की अपील की। उन्होंने कहा कि इंजीनियर देश की समस्याओं का समाधान खोजें, वैज्ञानिक मानवता के लिए उपयोगी अनुसंधान करें, उद्यमी रोजगार के नए अवसर पैदा करें और शिक्षक ज्ञान के साथ चरित्र निर्माण में भी योगदान दें।

उन्होंने कहा कि किसी भी राष्ट्र की महानता केवल आर्थिक विकास से तय नहीं होती, बल्कि उसके नागरिकों के चरित्र, सामाजिक जिम्मेदारी, संस्कृति और नैतिक मूल्यों से भी तय होती है। विश्वविद्यालय विद्यार्थियों में ज्ञान के साथ चरित्र, क्षमता के साथ संवेदनशीलता और सफलता के साथ सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना विकसित करने के लिए लगातार काम कर रहा है।

शोध, नवाचार और स्टार्टअप को बढ़ावा देने पर जोर

कुलगुरु प्रो. प्रकाश सिंह ने कहा कि डीसीआरयूएसटी को केवल अकादमिक उत्कृष्टता का केंद्र नहीं, बल्कि शोध, नवाचार, स्टार्टअप और उद्यमिता का अग्रणी संस्थान बनाया जाएगा। उन्होंने विद्यार्थियों से अपने अधिकारों के साथ संवैधानिक कर्तव्यों का भी पालन करने की अपील की। ईमानदारी, अनुशासन, पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक समरसता और राष्ट्र के प्रति समर्पण को उन्होंने प्रत्येक नागरिक का दायित्व बताया।

उन्होंने कहा कि भारत विविधताओं का देश है। यहां अलग-अलग भाषाएं, संस्कृतियां और परंपराएं हैं, लेकिन सभी की पहचान एक है कि हम भारतीय हैं। एकता, भाईचारे और सामूहिक प्रयासों के जरिए भारत को विश्व में अग्रणी राष्ट्र बनाने की दिशा में आगे बढ़ना होगा।

कुलगुरु ने विश्वास जताया कि युवाओं की प्रतिभा, शिक्षकों की प्रतिबद्धता, वैज्ञानिकों की सोच और देशवासियों की सामूहिक शक्ति के बल पर भारत वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र के रूप में नई ऊंचाइयां हासिल करेगा।

समारोह के अंत में उन्होंने सभी से राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भागीदारी निभाने तथा अपने ज्ञान, प्रतिभा और ऊर्जा को देश के विकास के लिए समर्पित करने का आह्वान किया। उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम के अमर बलिदानियों को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि हम सभी मिलकर ऐसा भारत बनाने में योगदान दें, जिस पर आने वाली पीढ़ियां गर्व कर सकें।

कार्यक्रम के अंत में छात्र कल्याण अधिष्ठाता प्रो. सुरेश वर्मा ने आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. अमित कुमार सहित शिक्षक और अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

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