हरियाणा के पूर्व उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला और जेजेपी नेता दिग्विजय सिंह चौटाला ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर आमरण अनशन कर रहे सोनम वांगचुक से मुलाकात की। दोनों नेताओं ने उनके गिरते स्वास्थ्य पर चिंता व्यक्त करते हुए उनसे अपना अनशन समाप्त करने की अपील की।

 चंडीगढ़। हरियाणा के पूर्व उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला और जननायक जनता पार्टी (जेजेपी) युवा इकाई के प्रदेशाध्यक्ष दिग्विजय सिंह चौटाला शुक्रवार को दिल्ली के जंतर-मंतर पहुंचे। दोनों नेताओं ने वहां आमरण अनशन पर बैठे देश के प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता और शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक से मुलाकात कर उनकी सेहत की जानकारी ली। पिछले करीब 20 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे वांगचुक की बिगड़ती शारीरिक स्थिति को देखते हुए जेजेपी नेताओं ने गहरी चिंता जताई।

अनशन खत्म करने की अपील

पत्रकारों से रूबरू होते हुए दुष्यंत चौटाला ने भरोसा जताया कि यह सामाजिक संघर्ष अपने मुकाम तक जरूर पहुंचेगा। उन्होंने सोनम वांगचुक के गिरते स्वास्थ्य का हवाला देते हुए उनसे अपनी भूख हड़ताल वापस लेने का विशेष आग्रह किया। पूर्व उपमुख्यमंत्री ने कहा कि किसी भी दीर्घकालिक जनांदोलन को सही दिशा में ले जाने के लिए उसके मार्गदर्शक का शारीरिक रूप से तंदुरुस्त रहना बेहद जरूरी है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इस लड़ाई को जनसमर्थन और लोकतांत्रिक तरीकों से आगे बढ़ाया जाना चाहिए।

इनसो का मिला साथ

मुलाकात के दौरान दिग्विजय सिंह चौटाला ने कहा कि देश के नौजवानों और विद्यार्थियों के हक में चलाई जा रही इस निस्वार्थ मुहिम में जननायक जनता पार्टी और उनका छात्र संगठन ‘इनसो’ पूरी ताकत के साथ सोनम वांगचुक के कदम से कदम मिलाकर खड़ा है। उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की कि युवाओं और शिक्षा जगत से जुड़े इन संवेदनशील मामलों पर प्रशासन को तुरंत सकारात्मक रुख अपनाना चाहिए।

इन मांगों पर अड़े वांगचुक

गौरतलब है कि सोनम वांगचुक का यह आमरण अनशन मुख्य तौर पर देश की राष्ट्रीय परीक्षा व्यवस्था में सामने आई कथित धांधलियों और छात्र हितों की रक्षा को लेकर आयोजित किया जा रहा है। उनकी मुख्य मांगों में ये बिंदु शामिल हैं:

  • नीट (NEET) सहित अन्य सभी राष्ट्रीय प्रतियोगी परीक्षाओं में हुए पेपर लीक और कथित अनियमितताओं की एक निष्पक्ष जांच कराई जाए।
  • भविष्य में पेपर लीक और परीक्षा संबंधी धांधली को रोकने के लिए देश की परीक्षा प्रणाली में बड़े पैमाने पर सुधार किए जाएं।
  • इन कथित परीक्षा घोटालों के कारण प्रभावित हुए सभी होनहार छात्रों को पूर्ण न्याय दिया जाए।
  • परीक्षा से जुड़े तमाम विभागों में अधिकारियों की जवाबदेही तय हो और दोषियों के खिलाफ कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाए।
  • परीक्षा के विवादों और मानसिक तनाव के चलते आत्महत्या करने वाले छात्रों के पीड़ित परिवारों को उचित सहायता व न्याय मिले।

विदित हो कि सोनम वांगचुक इससे पहले भी केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख को भारतीय संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने, वहां के पर्यावरण को बचाने और स्थानीय नागरिकों के अधिकारों के लिए लंबे समय तक आंदोलन कर चुके हैं।