विश्व हिंदू परिषद ने महाराष्ट्र भर में आयोजित होने वाले गरबा और डांडिया कार्यक्रमों में मुस्लिम समुदाय के प्रवेश पर पूरी तरह रोक लगाने की घोषणा की है. इस उत्सव का आयोजन 10 दिनों तक चलेगा. विश्व हिंदू परिषद ने आयोजकों के लिए नियम तय किए हैं साथ ही आने वालों के आधार कार्ड की जांच और हिंदू पहचान की पुष्टि के लिए माथे पर तिलक लगाने को कहा गया है. विहिप के इस फैसले के बाद राज्य में एक बार फिर राजनीतिक और सामाजिक बहस छिड़ गई है.

विश्व हिंदू परिषद ने महाराष्ट्र में नवरात्रि गरबा-डांडिया कार्यक्रमों में मुसलमानों के प्रवेश पर रोक लगा दी है. संगठन ने आयोजकों के लिए क्या करें और क्या न करें की लिस्ट भी जारी की है.

विश्व हिंदू परिषद (विहिप) ने आगामी 10 दिवसीय नवरात्रि उत्सव को लेकर एक बड़ा और कड़ा फैसला लिया है. विश्व हिंदू परिषद ने महाराष्ट्र में नवरात्रि उत्सव के दौरान मुसलमानों को गरबा और डांडिया कार्यक्रमों में भाग लेने से रोकने और उपस्थित लोगों पर सख्त नियम लागू करने का फैसला किया है.

महाराष्ट्र में 25 से 30 हजार सार्वजनिक गरबा मंडल हैं. विहिप के राष्ट्रीय प्रवक्ता और संयुक्त सचिव श्रीराज नायर ने कहा- नवरात्रि सिर्फ नाच-गाने का आयोजन नहीं, बल्कि देवी की आराधना का पर्व है. उन्होंने ने कहा है कि हमने नवरात्रि उत्सव के दौरान गरबा-डांडिया नृत्य में मुसलमानों की भागीदारी की अनुमति न देने का फैसला लिया है.

उन्होंने आगे कहा है कि जो मुसलमान मूर्ति पूजा के खिलाफ हैं, वे इस उत्सव में क्यों शामिल हों? हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि नवरात्रि कार्यक्रमों में मुसलमानों को शामिल न होने देने का मतलब यह नहीं है कि VHP किसी समुदाय के खिलाफ है. विहिप इन्हें एहतियाती कदम के तौर पर देखता है.

विहिप द्वारा जारी नए दिशा-निर्देशों के अनुसार, गरबा और डांडिया पंडालों में आने वाले प्रत्येक व्यक्ति की पहचान की कड़ी जांच की जाएगी. प्रवेश करने के लिए कुछ नियमों से होकर गुजरना पड़ेगा- पहचान पत्र की जांच, तिलक और रक्षा सूत्र, गोमूत्र का छिड़काव.

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