शिखिल ब्यौहार, भोपाल। मध्यप्रदेश की जीवनदायनी मां नर्मदा को लेकर एक बार फिर विवाद के साथ सियासत गर्म हो रही है। मामला सरकार के मां नर्मदा नदी पर नर्मदा पथ गमन प्रोजेक्ट से जुड़ा हुआ है। दरअसल, सरकार ने मां नर्मदा की परिक्रमा के लिए नर्मदा पथ प्रोजेक्ट की तैयारी शुरू कर दी है। उधर, पर्यावरणविदों ने इसे नदी संरक्षण के विपरीत बेहद घातक बताया है। साथ ही केंद्र सरकार के नदी संरक्षण नियम और सुप्रीम कोर्ट के गाइडलाइन का खुला उल्लंघन बताया जा रहा है। मामले को अब न्यायालय में ले जाया जाएगा।

मध्यप्रदेश के अमरकंटक से प्रकट हुई मां नर्मदा जिसे न्यायालय ने भी जीवित ईकाई का दर्जा दिया। धार्मिक आस्था कि एक मात्र ऐसी जीवन धारा जिसकी परिक्रमा भी की जाती है। इसी आस्था को लेकर रामपथ गमन प्रोजेक्ट के समान ही मध्यप्रदेश सरकार ने नर्मदा पथगमन प्रोजेक्ट की तैयारी की है। इस प्रोजेक्ट के तहत मां नर्मदा के भक्तों को मार्ग, घाटों का निर्माण, ठहराव की व्यवस्था समेत कई निर्माण कार्य किए जाएंगे। सरकार की इस कवायद को लेकर ही अब कई सवाल खड़े होने लगे हैं।

पर्यावरण संरक्षण के लिए न्यायालयों में जिम्मेदारों के खिलाफ लड़ाई लड़ने वाले राशिद नूर खान ने बताया कि नर्मदा की स्थिति बेहद चिंताजनक है। केंद्र सरकार के नियम समेत उच्चतम न्यायालय के भी निर्देश हैं। लिहाजा ऐसे में नियमों का उल्लंघन कर नर्मदा पथगमन का निर्माण सही नहीं। यह नर्मदा की विशेष जैवविविधता के लिए भी बड़ा खतरा होगा। 

उन्होंने यह भी कहा कि नर्मदा परिक्रमा सनातन के उद्भव से ही जारी है। यह आस्था का बड़ा केंद्र है। सरकार की पहले ही नर्मदा संरक्षण की तमाम कवायदों पर सवाल हैं। कई शहरों का सीवेज, उद्योगों का प्रदूषित रासायनिक पानी पवित्र जल में छोड़ा जा रहा है। रेत उत्खनन और जमीनों के खेल ने नर्मदा को छलनी-छलनी किया। लिहाजा सरकार को पथगमन के नाम पर आवाजाही, पेड़ कटाई और आबादी विस्तार के इस प्रोजेक्ट को रोक लगा संरक्षण के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए। 

राशिद ने सरकार से डीपीआर सार्वजनिक कर दावे-आपत्तियों की प्रक्रिया की मांग भी की। उन्होंने कहा कि 80 फीसदी मध्यप्रदेश के हिस्सों को तर करने वाली मां नर्मदा संबंधित कवायदों में हस्ताक्षेप का सीधा अधिकार जनता को होना चाहिए। मामले को एनजीटी समेत अन्य न्यायालीन मंचों पर ले जाया जाएगा।

क्या है नियम?

– नर्मदा के दोनों ओर 300 मीटर का नो-कंस्ट्रक्शन ज़ोन।

– मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की युगल पीठ के आदेशानुसार नर्मदा नदी के दोनों किनारों से 300 मीटर की दूरी तक किसी भी प्रकार का पक्का निर्माण या अतिक्रमण प्रतिबंधित है।

– नगर एवं ग्राम निवेश अधिनियम के नियमों में भी नर्मदा नदी के किनारे इस 300 मीटर के दायरे को सुरक्षित रखने का कड़ा प्रावधान है।

– नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने भी नर्मदा नदी में बढ़ते प्रदूषण और पर्यावरण क्षरण को रोकने के लिए नदी के फ्लडप्लेन (बाढ़ संभावित क्षेत्रों) को ‘नो-डेवलपमेंट ज़ोन’ घोषित किया है।

– सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार नदी या उसके आसपास किसी भी बड़ी परियोजना को शुरू करने से पहले केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय से कड़े मानकों वाली पर्यावरणीय मंजूरी लेना अनिवार्य है।

– अलग-अलग मामलों में न्यायालयों का साफ निर्देश है कि नर्मदा के किनारों पर पेड़ों की कटाई पर पूरी तरह रोक लगाई जाए और नदी के जलग्रहण क्षेत्र में सघन वृक्षारोपण किया जाए।

– हाई कोर्ट ने 1 अक्टूबर 2008 के बाद नर्मदा नदी के इस 300 मीटर के प्रतिबंधित दायरे में जितने भी पक्के निर्माण या अतिक्रमण हुए हैं, वे सभी पूरी तरह अवैध हैं और उन्हें अनिवार्य रूप से हटाया जाएगा।

– नर्मदा के तटों और जैवविविधता को किसी भी प्रकार से हस्ताक्षेप पर रोक।

– नदी की सहायक नदियों को लेकर भी कई आदेश, निर्देश. गाइडलाइन भी जारी की गई हैं।

मध्यप्रदेश में जीवनदायनी नर्मदा और परिक्रमा

– नर्मदा की कुल लंबाई 1 हजार 312 किलोमीटर की है।

– मध्यप्रदेश में नर्मदा की करीब 80 फीसदी भाग है, लंबाई 1077 किलोमीटर की है।

– मध्यप्रदेश के कुल 15 जिलों से नर्मदा बहती हैं।

– बाधों और अन्य भौगोलिक संरचना के कारण नर्मदा परिक्रमा करीब 2,500 से 3,650 किलोमीटर की होती है।

– धार्मिक महत्व से परिक्रमा के कई स्वरूप भी हैं। वाहनों परिक्रमा, पैदल परिक्रमा सड़क मार्ग के जरिए और तट परिक्रमा आदि हैं।

नर्मदा संरक्षण कर नहीं पाए, पथ के नाम पर करोड़ों खाकरने की तैयारी- कांग्रेस

मामले को लेकर कांग्रेस ने सरकार की कवायद पर कई सवाल खड़े किए। प्रदेश प्रवक्ता डॉ. विक्रम चौधरी ने बताया कि सरकार का नदी संरक्षण को लेकर कई रुझान नहीं है। यह कवायद सिर्फ धांधली के लिए शुरू की जा रही है। नर्मदा की गंभीर होती स्थिति इसका सीधा प्रमाण भी है। धार्मिक आस्थाओं के नाम पर बीजेपी सरकार ने हमेशा लोगों को छलने का काम किया है। प्रदेश ऐसा कोई नर्मदा तट का जिला नहीं यहां से नर्मदा में गंदे नालों को प्रशासन के सामने न मिलाया जा रहा हो। प्रदेश में सभी धार्मिक प्रोजेक्टों के नाम पर भारी भ्रष्टाचार किया गया है। उन्होंने कहा कि नदी संरक्षण के लिए पहल होनी चाहिए। सरकार नर्मदा, चंबल, शक्कर, तबा, बेतवा समेत कई नदियों से अवैध उत्तखनन करा रही है।

नियमों का रखेंगे ध्यान, यह लोगों की धार्मिक सुविधाओं की पहल- बीजेपी

बीजेपी प्रदेश प्रवक्ता अजय सिंह यादव ने कहा कि बीजेपी सरकार सनातन के रास्तों पर चल रही है। धार्मिकता के आधार पर कई निर्णय लिए जा रहे हैं। नर्मदा परिक्रमा के लिए सुविधाओं का पथ भी इसी कारण बनाया जाएगा। सरकार ने इस संबंध में तैयारी भी शुरू कर दी है। उन्होंने दावा किया कि जो भी नियम, निर्देश और गाइडलाइन हैं उनका पालन करेंगे। न्यायालय समेत किसी भी मंच पर अपनी बात रखने का सभी को अधिकार है।

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