वीरेन्द्र गहवई, बिलासपुर। बस्तर के चर्चित एर्राबोर पोटाकेबिन आश्रम (Errebor Potakebin Ashram) में 6 साल 10 महीने की बच्ची से दुष्कर्म (Rape) के मामले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट (CG High Court) ने फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट द्वारा सुनाई गई मौत तक कैद की सजा में आंशिक संशोधन करते हुए आरोपी को 20 वर्ष की कैद में बदला है। कोर्ट ने शेष सजा को यथावत रखा है। मामले में चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा एवं जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डीबी ने यह फैसला सुनाया है।

यह है पूरा मामला
बता दें कि 24.07.2023 को पीड़िता की मां ने रिपोर्ट दर्ज कराई कि उसकी लगभग 6 साल 10 महीने की नाबालिग बेटी एर्राबोर के पोटाकेबिन आश्रम में रहती थी। 22.07.2023 की रात को वह अपने कमरे से गायब हो गई और मिलने पर उसने दर्द की शिकायत करते हुए बताया कि एक व्यक्ति उसे दूसरे कमरे में ले गया और उसके साथ यौन उत्पीड़न किया। रिपोर्ट दर्ज होने के बाद पुलिस ने आईपीसी की धाराओं और पॉक्सो एक्ट की धारा के तहत मामला दर्ज किया।
वहीं पीड़िता को मेडिकल जांच के लिए सुकमा के जिला अस्पताल भेजा गया। आरोपी माडवी हिडमा उर्फ सोनू उर्फ राजू, निवासी स्टाफ क्वार्टर पोटाकेबिन एर्राबोर, को 27.07.2023 को गिरफ्तार किया गया और उसे भी मेडिकल जांच के लिए भेजा गया, जिसमें वह यौन संबंध बनाने में सक्षम पाया गया।
गवाहों के बयान धारा 161 के तहत और पीड़िता का बयान धारा 164 के तहत दर्ज किया गया। जांच के दौरान पहचान की कार्रवाई भी की गई। सामान्य जांच पूरी होने के बाद अपीलकर्ता के खिलाफ आईपीसी की धारा 450, 363, 366, 324, 376 और पॉक्सो एक्ट की धारा 6 के तहत अपराध के लिए ट्रायल कोर्ट में चार्जशीट दायर की गई।
ट्रायल कोर्ट ने आरोपी को सुनाई थी उम्रकैद की सजा
ट्रायल कोर्ट ने सुनवाई के बाद अपराध सिद्ब होने पर आरोपी को आईपीसी की धारा 450 के तहत 10 साल की सजा और 1,000 रुपये का जुर्माना, जुर्माना न देने पर 1 साल के लिए और सजा। आईपीसी की धारा 363 के तहत 3 साल की सज़ा और 1,000 रुपये का जुर्माना, जुर्माना न देने पर 1 साल के लिए सजा। आईपीसी की धारा 366 के तहत 3 साल की सजा और 1,000 रुपये का जुर्माना, जुर्माना न देने पर 1 साल के लिए और सजा।
आईपीसी की धारा 324 के तहत 3 साल की सजा और 1,000 रुपये का जुर्माना, जुर्माना न देने पर 1 साल के लिए और सजा। प्रोटेक्शन ऑफ़ चिल्ड्रन फ्रॉम सेक्सुअल ऑफेंस एक्ट, 2012 (शॉर्ट में ‘पास्को एक्ट’) की धारा 6 के तहत, मौत होने तक उम्रकैद, 5,000/- रुपये का जुर्माना, जुर्माना न देने पर 1 साल का अतिरिक्त कैद की सजा सुनाई। अदालत ने सभी सजाओं को साथ चलाने का निर्देश दिया।
सजा के खिलाफ आरोपी ने हाईकोर्ट में दायर की याचिका
सजा के खिलाफ आरोपी ने हाईकोर्ट में अपील की। अपील पर चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच में सुनवाई हुई। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि सबसे जरूरी सवाल यह है कि क्या यह तय किया जाना चाहिए कि ट्रायल कोर्ट ने अपील करने वाले को आईपीसी की धारा 450, 363, 366 और 324 और प्रोटेक्शन ऑफ़ चिल्ड्रन फ्रॉम सेक्सुअल ऑफ़ेंस एक्ट, 2012 की धारा 6 के तहत अपराधों के लिए सजा सुनाई है।
पॉक्सो एक्ट की धारा 6 के तहत अपराध के लिए, अपील करने वाले को जुर्माने के साथ बाकी बची ज़िंदगी तक उम्रकैद की सजा सुनाई गई है। पास्को एक्ट की धारा 6 के तहत, तय की गई कम से कम सजा बीस साल की सख़्त कैद है, जिसे बढ़ाकर उम्रकैद किया जा सकता है, यानी बाकी बची ज़िंदगी तक सजा।
आईपीसी के नियमों के तहत दी गई सजाएं संबंधित अपराधों के लिए तय कानूनी सीमाओं के अंदर हैं। इस मामले के खास तथ्यों और हालात, पीड़ित की उम्र, रिकॉर्ड में मौजूद सबूतों की प्रकृति और जिन कुल हालात में अपराध किया गया था, उन्हें देखते हुए, इस कोर्ट का मानना है कि अगर पास्को एक्ट के सेक्शन 6 के तहत अपील करने वाले को दी गई सजा को बाकी ज़िंदगी की कैद से घटाकर बीस साल की सख़्त कैद कर दिया जाए, तो यह इंसाफ के लायक होगा।
पॉक्सो एक्ट के सेक्शन 6 के तहत दी गई जुर्माने की सजा और डिफ़ॉल्ट की शर्त को बनाए रखा जाता है। आईपीसी के सेक्शन 450, 363, 366 और 324 के तहत दी गई सजा और दोषसिद्धि को भी बनाए रखा जाता है। सभी सजाओं को एक साथ चलाने का निर्देश दिया जाता है।
Lalluram.Com के व्हाट्सएप चैनल को Follow करना न भूलें.
https://whatsapp.com/channel/0029Va9ikmL6RGJ8hkYEFC2H
- छत्तीसगढ़ की खबरें पढ़ने यहां क्लिक करें
- लल्लूराम डॉट कॉम की खबरें English में पढ़ने यहां क्लिक करें
- मनोरंजन की बड़ी खबरें पढ़ने के लिए करें क्लिक

