संजय पाटीदार, भोपाल। मध्यप्रदेश सरकार अब फिजूलखर्ची पर सख्त नजर आ रही है। सरकारी विभागों में कंप्यूटर, प्रिंटर और दूसरे आईटी उपकरणों की खरीदी पर पहली बार खर्च की सीमा तय कर दी गई है। अब जरूरत से ज्यादा खरीदी करना आसान नहीं होगा। अब साल भर में एक करोड़ रुपये से अधिक की खरीदी के लिए उच्च स्तर से मंजूरी लेना जरूरी होगा। सरकार का मानना है कि इससे सरकारी खर्चो पर नियंत्रण लगेगा और खरीदी प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ेगी।

मध्यप्रदेश सरकार अब सरकारी खर्चो पर लगाम कसने की तैयारी में है। वित्त विभाग ने कंप्यूटर, प्रिंटर और अन्य आईटी उपकरणों की खरीदी को लेकर नई गाइडलाइन जारी की है। इसके तहत सभी विभागों के लिए तय सीमा के भीतर ही खरीदी करना अनिवार्य होगा। इससे यह माना जा सकता है कि अनावश्यक खर्च पर रोक लगेगी और सरकारी धन का बेहतर उपयोग हो सकेगा।

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अधिकतम सीमा एक करोड़

नई व्यवस्था के तहत कंप्यूटर और प्रिंटर खरीदी की अधिकतम सीमा एक करोड़ रुपये तय की गई है। यदि किसी विभाग को इससे अधिक राशि की खरीदी करनी होगी, तो उसे उच्च स्तर से अनुमति लेना अनिवार्य होगा। अब तक इस तरह की खरीदी के लिए कोई स्पष्ट और समान नियम लागू नहीं थे। अलग-अलग विभाग अपनी जरूरत और बजट के हिसाब से उपकरण खरीद रहे थे। कई मामलों में जरूरत से ज्यादा खरीदी और संसाधनों की दोहराव वाली खरीद की शिकायतें भी सामने आती रही हैं।

वित्तीय अनुशासन मजबूत करने पर जोर

नई गाइडलाइन में विभागों को पुराने कंप्यूटर और प्रिंटर के बेहतर उपयोग, उनकी मरम्मत और वास्तविक जरूरत के आधार पर ही नई खरीदी करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके साथ ही खरीदी प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने और वित्तीय अनुशासन मजबूत करने पर भी जोर दिया गया है।

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