संजय पाटीदार, भोपाल। मध्य प्रदेश में अब नगर निगम की फाइलें मोबाइल में सिमटने जा रही हैं। राज्य सरकार ‘एमपी लॉकर ऐप’ के जरिए शहरी प्रशासन को पूरी तरह डिजिटल मोड में लाने की तैयारी में है। इस नई व्यवस्था के लागू होते ही संपत्ति कर, जल कर, लाइसेंस, भुगतान रसीद और नगर निगम से जुड़े 22 से ज्यादा दस्तावेज सीधे नागरिकों के मोबाइल पर उपलब्ध होंगे। यानी अब सरकारी दफ्तरों के चक्कर, लंबी लाइनें और दस्तावेज खोजने की परेशानी काफी हद तक खत्म हो सकती है।

एमपी सरकार इसे सिर्फ एक ऐप नहीं, बल्कि मोबाइल नगर निगम मॉडल के रूप में देख रही है। अधिकारियों का मानना है कि डिजिटल रिकॉर्ड आने से फर्जी दस्तावेज, रिकॉर्ड में गड़बड़ी और सत्यापन में देरी जैसी समस्याओं पर भी लगाम लगेगी। खासतौर पर संपत्ति और भवन अनुमति से जुड़े मामलों में ऑनलाइन रिकॉर्ड सिस्टम बड़ा बदलाव ला सकता है। रियल एस्टेट सेक्टर ने भी इस पहल को गेमचेंजर बताया है।

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तेज और पारदर्शी होगी प्रक्रिया

क्रेडाई भोपाल का कहना है कि भवन अनुमति, टैक्स रिकॉर्ड और संपत्ति दस्तावेज ऑनलाइन सत्यापित होने से बैंक लोन, प्रोजेक्ट अप्रूवल और ग्राहक प्रक्रिया पहले से ज्यादा तेज और पारदर्शी होगी। इससे बिल्डर्स, निवेशकों और आम नागरिकों तीनों को फायदा मिलेगा। क्रेडाई से जुड़े मनोज मीक ने कहा कि एमपी लॉकर भविष्य की डिजिटल सिटी गवर्नेंस की शुरुआत है। उनका सुझाव है कि आगे चलकर इस प्लेटफॉर्म को ई-नगरपालिका, GIS मैपिंग, संपत्ति रिकॉर्ड और AI आधारित शहरी डैशबोर्ड से जोड़ा जाए, ताकि नागरिकों को एक ही ऐप पर सभी नगरीय सेवाएं मिल सकें।

दरअसल, दूसरे राज्यों के मॉडल ने भी मध्य प्रदेश पर दबाव बढ़ाया है। गुजरात का ई-नगर पोर्टल करोड़ों के राजस्व और लाखों ऑनलाइन ट्रांजैक्शन तक पहुंच चुका है, जबकि केरल और तेलंगाना में सैकड़ों सरकारी सेवाएं मोबाइल प्लेटफॉर्म पर शिफ्ट हो चुकी हैं।

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