प्रभाकर सिंह, कटनी। मध्य प्रदेश के कटनी की नगर पुलिस अधीक्षक (CSP) नेहा पच्चीसिया की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय से याचिका खारिज होने और अंतरिम राहत न मिलने के बाद अब पुलिस महकमे ने उनके खिलाफ सख्त कानूनी रुख अपना लिया है। भोपाल सतर्कता शाखा की शिकायत और जबलपुर जोन के निर्देश पर कटनी के कुठला थाने में CSP समेत अन्य आरोपियों पर धोखाधड़ी, दबाव बनाने व आपराधिक सांठगांठ की धाराओं में मामला दर्ज कर लिया गया है।
पूरा मामला कुठला थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली खसरा नंबर 2618/1 की बेशकीमती जमीन के सौदे से जुड़ा है। विभागीय जांच में सामने आया कि सरकारी गाइडलाइन के अनुसार इस जमीन की वास्तविक कीमत 82 लाख 86 हजार 930 रुपये थी। हालांकि, पुलिसिया तंत्र और पद के रसूख का कथित दुरुपयोग कर इस जमीन की रजिस्ट्री मात्र 18 लाख 20 हजार रुपये में करवा ली गई। इसमें कागजों पर 15 लाख रुपये चेक के माध्यम से और 3.20 लाख रुपये नकद देना दर्शाया गया। जबलपुर की अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ASP) अनु बेनीवाल द्वारा की गई गहन जांच में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं।
बैंक स्टेटमेंट से खुला सांठगांठ का बड़ा खेल
जमीन का क्रेता मारूफ अहमद हनफी कागजों में खरीदार बना था, लेकिन उसके बैंक खाते में जमीन खरीदने लायक रकम ही मौजूद नहीं थी। 11 जुलाई 2025 को उसके खाते में महज 3,036 रुपये और 1 जुलाई 2026 को सिर्फ 1,61,516 रुपये जमा थे।
रजिस्ट्री वाले दिन पहुंचे 15 लाख
15 अप्रैल 2026 को यानी रजिस्ट्री के ठीक दिन मारूफ के खाते में अचानक 15 लाख रुपये ट्रांसफर किए गए।
एक ही PAN से जुड़ीं दो संस्थाएं
जांच में पता चला कि मारूफ के खाते में 10 लाख रुपये ‘शाइन पार्टनर्स’ के खाते से और 5 लाख रुपये क्षितिज राज बारापात्रे के खाते से भेजे गए थे। गहराई से पड़ताल करने पर सामने आया कि ‘शाइन पार्टनर्स’ और क्षितिज राज बारापात्रे, दोनों के बैंक खातों में एक ही PAN नंबर दर्ज है।
जांच रिपोर्ट के अनुसार, क्षितिज राज बारापात्रे को CSP नेहा पच्चीसिया का करीबी, संबंधी या व्यावसायिक पार्टनर माना गया है। पीड़ित रमेश लोधी जब एक हत्या के आपराधिक मामले की जांच का सामना कर रहे थे, उसी दौरान उनसे औने-पौने दामों में जमीन बेचने का दबाव बनाया गया। रमेश के बेटे आकाश लोधी का आरोप है कि जब उनके पिता ने जेल में रहने के दौरान हुई इस विवादित रजिस्ट्री और नामांतरण को रद्द कराने के लिए आवेदन दिए, तो उनके पूरे परिवार को धमकाया गया। पीड़ित परिवार की आवाज दबाने के लिए रमेश लोधी और उनके दामाद (जीजा) को भी हत्या के मुकदमे में आरोपी बनाकर जेल भिजवा दिया गया।
नेहा पच्चीसिया के कार्यकाल के दौरान कई अन्य गंभीर शिकायतें भी सामने आ चुकी हैं
जुलाई में वाहन चेकिंग के दौरान एक ट्रांसपोर्टर से 30,000 रुपये की अवैध मांग का आरोप लगा था। इसके बाद उनके ड्राइवर को निलंबित कर दिया गया था और CSP से तीन थानों का प्रभार वापस ले लिया गया था। हत्याकांड में चालान पेश न करना कुठला थाने में दर्ज हत्या के मामले में तय समयावधि के भीतर चालान न्यायालय में पेश न करने के कारण मुख्य आरोपी को ‘डिफॉल्ट जमानत’ मिल गई थी, जिसमें CSP की कार्यप्रणाली पर वरिष्ठ अधिकारियों ने नाराजगी जताई थी।
वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर FIR दर्ज
शिकायत पहले भोपाल स्थित सतर्कता शाखा पहुंची, जहां से मामला जबलपुर जोन भेजा गया। ADGP/IGP जबलपुर के निर्देश पर ASP अनु बेनीवाल ने बैंक खातों, दस्तावेजों और ट्रांजैक्शन की बिंदुवार जांच कर विस्तृत रिपोर्ट सौंपी। इसके आधार पर 18 अगस्त 2026 को जबलपुर जोन कार्यालय ने कटनी पुलिस अधीक्षक को वैधानिक कार्रवाई के निर्देश दिए, जिसके बाद कुठला थाने में प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई। वर्तमान में पुलिस बैंको के लेनदेन, जमीन नामांतरण प्रक्रिया और इस पूरे नेटवर्क में शामिल आरोपियों की भूमिका की सघन जांच कर रही है।
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