देश में समान नागरिक संहिता यानी UCC को लेकर तेजी से काम चल रहा है. इसी क्रम में अब पश्चिम बंगाल में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है, जिसके लिए ड्राफ्टिंग कमेटी की पहली बैठक दिल्ली में आयोजित की जा रही है. UCC के आने से 13 मैरिज एक्ट रद्द हो जाएंगे. माना जा रहा है नया बिल पास होते ही पश्चिम बंगाल में हिंदू-मुस्लिम विवाह, तलाक और लिव-इन रिलेशनशिप जैसे घटनाक्रमों पर गहरा असर पड़ेगा.
श्चिम बंगाल के प्रस्तावित UCC के तहत 13 अलग-अलग विवाह कानूनों की जगह एक समान कानून लाने की तैयारी है. इसके लिए पहली मीटिंग आज यानी गुरुवार दिल्ली में होगी.
पश्चिम बंगाल में समान नागरिक संहिता लागू करने के लिए ड्राफ्टिंग कमेटी की प्रक्रिया शुरू हो गई है. UCC के आने से 13 मैरिज एक्ट की जगह एक सिंगल कानून लाया जा सकता है. नए ढांचे के तहत विवाह, तलाक, गुजारा भत्ता, एलिमनी, बच्चों की कस्टडी और संपत्ति के उत्तराधिकार जैसे मामलों में सभी समुदायों के लिए समान नियम लागू करने का प्रस्ताव बताया जा रहा है. इस नए कानूनी ढांचे का मुख्य ध्यान लैंगिक समानता और धर्म-तटस्थता पर होगा.
हालांकि, अनुसूचित जनजातियों को इस कोड के दायरे से बाहर रखा जाएगा और पारंपरिक सांस्कृतिक रीति-रिवाजों में कोई हस्तक्षेप नहीं किया जाएगा.
UCC ड्राफ्ट करने के लिए इसकी पहली बैठक आज 3 सितंबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट की पूर्व जज जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में दिल्ली के बंगा भवन में होगी.
जानकारी के अनुसार, जो 13 मैरिज एक्ट्स को बदलने की तैयारी दिख रही है. वे हैं-
- इंडियन तलाक अधिनियम, 1869
- भारतीय ईसाई विवाह अधिनियम, 1872
- बंगाल मुस्लिम विवाह एवं तलाक पंजीकरण अधिनियम, 1876
- आनंद विवाह अधिनियम, 1909 (Anand Marriage Act, 1909)
- पारसी विवाह एवं तलाक अधिनियम, 1936
- आर्य विवाह मान्यता अधिनियम, 1937
- मुस्लिम पर्सनल लॉ (शरीयत) आवेदन अधिनियम, 1937
- मुस्लिम विवाह विघटन अधिनियम, 1939
- विशेष विवाह अधिनियम, 1954
- हिंदू विवाह अधिनियम, 1955
- विदेशी विवाह अधिनियम, 1969
- मुस्लिम महिला (तलाक पर अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम, 1986
- मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) अधिनियम, 2019
इन सभी एक्ट्स को रद्द कर इसकी जगह एक एक्ट लाया जाएगा. हालांकि, इस नए एक्ट में सांस्कृतिक रीति रिवाजों, पहनावे और रस्मों में कोई दखल नहीं किया जाएगा.
प्रस्तावित UCC के तहत बंगाल में सभी शादियों का रजिस्ट्रेशन तय समय-सीमा के भीतर राज्य द्वारा अधिसूचित अधिकारियों के पास कराना अनिवार्य होगा. प्रस्तावित कोड के तहत कोर्ट के बाहर तलाक को लीगल नहीं माना जाएगा.
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