प्रदीप मालवीय, उज्जैन। धार्मिक और सांस्कृतिक नगरी उज्जैन से सेवा भाव आर मानवता की एक बेहद खूबसूरत तस्वीर सामने आई है। देश की सबसे बड़ी प्रतियोगी परीक्षाओं में से एक NEET-2026 में शामिल होने आए हजारों विद्यार्थियों और उनके परेशान अभिभावकों के लिए श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति ने मदद का हाथ बढ़ाया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मंशानुसार, मंदिर समिति ने जिले के सभी 8 परीक्षा केंद्रों पर परीक्षार्थियों और उनके परिजनों के लिए नि:शुल्क जलपान और अल्पाहार की व्यवस्था की।
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परीक्षा के तनाव के बीच ‘अन्नक्षेत्र’ का संबल
नीट परीक्षा को लेकर देश भर में जारी गहमागहमी और तनाव के बीच महाकाल मंदिर समिति का यह प्रयास छात्र-छात्राओं के चेहरे पर मुस्कान लाने वाला है। मंदिर के प्रशासक एवं अपर कलेक्टर प्रथम कौशिक ने बताया कि इस परीक्षा में करीब 4,171 परीक्षार्थी शहर पहुंचे। कड़कड़ाती धूप और परीक्षा के तनाव के बीच केंद्रों के बाहर परेशान होने वाले अभिभावकों और बच्चों को भूखे-प्यासे न रहना पड़े, इसके लिए श्री महाकालेश्वर मंदिर के प्रसिद्ध निःशुल्क अन्नक्षेत्र के माध्यम से यह सेवा दी गई।
कलेक्टर प्रथम कौशिक ने कहा कि हमारा उद्धेश्य केवल परीक्षा कराना नहीं बल्कि बाहर से आए बच्चों को एक सकारात्मक और घरेलू माहौल देना रहा। उन्होंने आगे कहा कि बाबा महाकाल के दर से कोई भूखा या परेशान न लौटे, यही हमारी सेवा भाव है।
इन 8 परीक्षा केंद्रों पर तैनात रही टीमें
इस पुनीत कार्य को सुचारु रूप से चलाने के लिए प्रत्येक केंद्र पर सहायक प्रशासक, प्रभारी और सह-प्रभारियों के साथ बड़ी संख्या में कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई। संपूर्ण व्यवस्था की कमान उप प्रशासक एवं डिप्टी कलेक्टर सिम्मी यादव ने संभाला। जिन केंद्रों पर यह सुविधा दी गई उनके नाम गवर्मेंट इंजीनियरिंग कॉलेज, पीएम श्री केवी इंजीनियरिंग कॉलेज, पॉलिटेक्निक कॉलेज, गवर्नमेंट गर्ल्स पीजी कॉलेज, उत्कृष्ट विद्यालय माधवनगर, कालिदास गर्ल्स कॉलेज, महाराजवाड़ा क्रमांक-2 स्कूल, गर्ल्स स्कूल सराफा है।
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अभिभावकों ने जताया आभार: ‘ये सिर्फ बाबा की नगरी में है संभव’
परीक्षा केंद्रों के बाहर मौजूद अभिभावकों ने मंदिर समिति और मध्य प्रदेश सरकार की इस पहल की जमकर सराहना की। दूर-दराज के शहरों से आए परिजनों का कहना था कि परीक्षा के दिनों में अमूमन केंद्रों के बाहर अव्यवस्था और महंगे खाने-पीने की मार झेलनी पड़ती है लेकिन महाकाल की नगरी में मिला यह अपनापन और सेवा भाव उनके दिल को छू गया।

