कर्ण मिश्रा, ग्वालियर। सड़क निर्माण को लेकर नगर निगम के रिकॉर्ड ने ही कई सवाल खड़े कर दिए हैं। हाईकोर्ट में पेश रिपोर्ट के मुताबिक पिछले साढ़े पांच साल में निगम ने 310 करोड़ 77 लाख रुपए कीमत के 1441 सड़क कामो को मंजूरी दी, लेकिन इनमें से 575 काम आज तक शुरू ही नहीं हुए। इतना ही नहीं, कई जगह पहले सड़क का टेंडर हुआ और काम शुरू होने के बाद याद आया कि नीचे सीवर लाइन भी बिछानी है। ऐसे में बनी-बनाई सड़कों को दोबारा खोदने की नौबत आ गई। अब हाईकोर्ट ने सड़कों की गुणवत्ता की ऑन-स्पॉट जांच कराने के निर्देश दिए हैं। निगम मिनी ट्रक में पांच साल का रिकॉर्ड लेकर हाईकोर्ट पहुंचा था।
मिनी ट्रक में रिकॉर्ड पहुंचा कोर्ट
ग्वालियर की सड़कों को लेकर हाईकोर्ट में नगर निगम की ओर से पेश की गई रिपोर्ट में 01 जनवरी 2021 से 11 अगस्त 2026 तक का ब्यौरा सामने आया है। यह पूरा ब्यौरा मिनी ट्रक में भर कर हाईकोर्ट लाया गया। इस दौरान नगर निगम ने 1441 सड़क कार्यों के लिए करीब 310 करोड़ 77 लाख रुपए का प्रावधान किया। लेकिन हैरानी की बात ये है कि इनमें से 575 काम शुरू ही नहीं हो सके। इन अधूरे कामों की अनुमानित लागत करीब 114 करोड़ 68 लाख रुपए है।

सड़क बनने के बाद आई सीवर लाइन की याद
निगम के पूरे रिकॉर्ड पर नजर डालें तो 750 सड़क कार्य पूरे हो चुके हैं, 116 काम प्रगति पर हैं और 575 काम अभी शुरू नहीं हुए। यानी निगम के आंकड़ों के मुताबिक हर 10 में करीब 4 सड़क कार्य जमीन पर उतर ही नहीं पाए। सबसे बड़ा सवाल उन सड़कों को लेकर है, जहां पहले सड़क का टेंडर हुआ और बाद में सीवर लाइन की याद आई।
बनाने के बाद दोबारा खोदी सड़क
नतीजा ये हुआ कि कहीं सड़क बनने से पहले ही सीवर का काम अटक गया, तो कहीं बनी सड़क को सीवर लाइन के लिए दोबारा खोदने की नौबत आ गई। रिपोर्ट में इसका उदाहरण वार्ड-52 में सामने आया, जहां ऑटो स्टैंड के पास 34 लाख 53 हजार रुपए की सड़क का काम सीवर लाइन के कारण शुरू नहीं हो सका।
ये सड़क हुए प्रभावित
वार्ड-53 के रूपा विहार और तुलसी कॉलोनी में 19 लाख 44 हजार और 10 लाख 77 हजार रुपए के दो काम सीवर लाइन के कारण अटके हुए हैं
वार्ड-35 में भी मानिक वाली गली से जुड़े 8.04 लाख, 17.34 लाख और 8.28 लाख रुपए के तीन सड़क कार्य सीवर लाइन के कारण प्रभावित हैं
वार्ड-48 में 24 लाख 61 हजार रुपये का सड़क कार्य भी वाटर-सीवर लाइन के कारण रुका हुआ है
करोड़ों खर्च के बाद जमीन पर कितनी टिकाऊ सड़क
यानी एक तरफ सड़क निर्माण पर करोड़ों रुपए खर्च हो रहे हैं, दूसरी तरफ विभागों के बीच तालमेल की कमी के चलते सड़क और सीवर के काम आपस में उलझ रहे हैं। अब हाईकोर्ट ने ग्वालियर की 8 सड़कों की निर्माण गुणवत्ता की जांच कराने के निर्देश दिए हैं। एडवोकेट कमिश्नर और तकनीकी विशेषज्ञ मौके पर जाकर सड़कों की जांच करेंगे और जरूरत पड़ने पर सड़क की खुदाई कर निर्माण सामग्री के सैंपल लिए जाएंगे। अब इस ऑन-स्पॉट जांच में ये साफ होगा कि ग्वालियर की सड़कों पर खर्च हुए करोड़ों रुपए का काम जमीन पर कितना टिकाऊ है और जिम्मेदारी आखिर किसकी तय होती है।
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