कृष्ण कुमार सैनी, चंडीगढ़: हरियाणा में सरकारी नौकरियों को लेकर कांग्रेस और भाजपा की सरकारों के कामकाज की तुलना करते हुए भाजपा ने कांग्रेस पर भर्ती प्रक्रिया में अनियमितता और भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं। भाजपा का दावा है कि कांग्रेस के 10 साल के शासनकाल में करीब 86 हजार सरकारी नौकरियां दी गईं, जबकि भर्ती प्रक्रियाओं को लेकर कई बार सवाल उठे और कुछ मामलों में हाईकोर्ट को भी हस्तक्षेप करना पड़ा।

इसके विपरीत भाजपा सरकार अपने कार्यकाल में बिना पर्ची-बिना खर्ची भर्ती प्रक्रिया के जरिए 2 लाख से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरी देने का दावा कर रही है। साथ ही सरकार के अनुसार 1.25 लाख से अधिक युवाओं को कौशल रोजगार के अवसर भी उपलब्ध कराए गए हैं।

कांग्रेस के दौर पर उठाए भर्ती प्रक्रिया के सवाल

भाजपा की ओर से जारी तुलनात्मक आंकड़ों में कांग्रेस शासन के दौरान हुई भर्तियों को लेकर अनियमितता और भ्रष्टाचार के आरोपों को प्रमुखता से उठाया गया है। पार्टी का कहना है कि कई भर्ती प्रक्रियाओं में विवाद सामने आए और अनियमितताओं के कारण कुछ भर्तियों को हाईकोर्ट की ओर से रद्द भी किया गया।

भाजपा का आरोप है कि उस दौर में सरकारी नौकरी पाने के लिए युवाओं के बीच सिफारिश और पर्ची-खर्ची की धारणा मजबूत हुई, जिससे भर्ती व्यवस्था और सरकार पर युवाओं के भरोसे को नुकसान पहुंचा।

BJP का दावा- ‘पर्ची नहीं, मेरिट से मिल रही नौकरी’

भाजपा सरकार का कहना है कि मौजूदा भर्ती व्यवस्था में पारदर्शिता और मेरिट (योग्यता) को प्राथमिकता दी गई है। पार्टी के अनुसार अब सरकारी नौकरी के लिए किसी सिफारिश या आर्थिक लेन-देन की जरूरत नहीं है और चयन प्रक्रिया योग्यता के आधार पर पूरी की जा रही है।

सरकार के दावे के मुताबिक, अब तक 2 लाख से ज्यादा युवाओं को सरकारी नौकरी मिल चुकी है, जबकि 1.25 लाख से अधिक युवाओं को कौशल रोजगार के जरिए रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए गए हैं।

‘युवाओं का हक अब पर्ची नहीं, मेरिट तय करती है’

भाजपा ने कांग्रेस और अपने शासनकाल की तुलना करते हुए कहा कि दोनों सरकारों की भर्ती नीति में स्पष्ट अंतर दिखाई देता है। पार्टी का कहना है कि एक तरफ कांग्रेस के कार्यकाल में भर्ती प्रक्रिया को लेकर सिफारिश, अनियमितता और भ्रष्टाचार के आरोप सामने आए, वहीं भाजपा सरकार ने पारदर्शिता और मेरिट आधारित चयन को प्राथमिकता दी है।

भाजपा के अनुसार हरियाणा के युवाओं का हक अब पर्ची नहीं, मेरिट तय करती है। हालांकि, कांग्रेस की ओर से इन दावों और आंकड़ों पर प्रतिक्रिया सामने आने के बाद ही दोनों पक्षों का पूरा पक्ष स्पष्ट हो सकेगा।

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