IDFC फर्स्ट बैंक के कथित 590 करोड़ रुपये के घोटाले के बावजूद हरियाणा के 87 नगर निकायों में अब भी 1,725 बैंक खाते सक्रिय चल रहे हैं। इसे लेकर कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह ने प्रदेश की भाजपा सरकार पर वित्तीय लापरवाही और जनता के पैसे से खिलवाड़ का आरोप लगाते हुए उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।
कृष्ण कुमार सैनी, चंडीगढ़। IDFC फर्स्ट बैंक के कथित 590 करोड़ रुपये के नगर निकाय डिपॉजिट घोटाले को लेकर हरियाणा सरकार पर कांग्रेस ने एक बार फिर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह ने आरोप लगाया कि इतने बड़े वित्तीय घोटाले के सामने आने के बावजूद प्रदेश सरकार ने इससे कोई सबक नहीं लिया है। उन्होंने कहा कि आज भी हरियाणा के 87 नगर निकायों में 2,381 बैंक खाते संचालित हैं, जिनमें से 1,725 खाते अब भी सक्रिय हैं।
राव नरेंद्र सिंह ने कहा कि जनता के सैकड़ों करोड़ रुपये इतने अधिक बैंक खातों में बिखरे हुए हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर सरकारी धन को इतने खातों में रखने की जरूरत क्यों पड़ी और इन खातों की नियमित निगरानी व ऑडिट क्यों नहीं किया गया।
‘यह वित्तीय लापरवाही नहीं, जनता के पैसे से खिलवाड़’
कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष ने भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि यह महज वित्तीय लापरवाही का मामला नहीं है, बल्कि जनता के टैक्स के पैसे के साथ गंभीर खिलवाड़ है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने पारदर्शिता और जवाबदेही को पूरी तरह ताक पर रख दिया है।
उन्होंने कहा कि IDFC बैंक डिपॉजिट मामले में करीब 590 करोड़ रुपये के कथित घोटाले ने सरकारी धन के प्रबंधन और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। इसके बावजूद प्रदेश के नगर निकायों में बड़ी संख्या में बैंक खातों का संचालन जारी है।
87 नगर निकायों में 2,381 बैंक खाते, 1,725 सक्रिय
हाल ही में सामने आई जानकारी के अनुसार हरियाणा के 87 नगर निकायों में कुल 2,381 बैंक खाते पाए गए हैं। इनमें से 1,725 खाते यानी करीब 73 प्रतिशत खाते सक्रिय हैं। वहीं 154 खाते बंद किए जा चुके हैं, जबकि 502 खाते बंद करने की प्रक्रिया में हैं।
कांग्रेस ने इस पूरी व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि नगर निकायों के इतने अधिक बैंक खातों में जनता का पैसा क्यों रखा गया है और इन खातों में मौजूद धनराशि की निगरानी किस स्तर पर की जा रही है।
सभी खातों का ऑडिट और उच्चस्तरीय जांच की मांग
राव नरेंद्र सिंह ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच की मांग की है। उन्होंने कहा कि सभी नगर निकायों के बैंक खातों का व्यापक ऑडिट कराया जाना चाहिए। साथ ही, यदि किसी स्तर पर वित्तीय अनियमितता या लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदार अधिकारियों और अन्य दोषी लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि जनता के टैक्स से जमा धन की सुरक्षा सरकार की जिम्मेदारी है और किसी भी स्तर पर लापरवाही या अनियमितता को बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए।

