अमेरिका में ट्रंप सरकार लगातार प्रवासियों पर सख्ती कर रही है। बर्थ टूरिस्म पर लगाम लगाने के बाद अब ट्रंप प्रशासन H-1B वीजा पर काम कर रहे विदेशी कर्मचारियों की मुश्किलें बढ़ाने वाला है। दरअसल, ट्रंप सरकार नौकरी जाने के बाद नई नौकरी तलाशने के लिए मिलने वाली 60 दिन की मोहलत खत्म करने पर विचार कर रही है। अगर यह बदलाव लागू होता है तो नौकरी जाने के बाद अमेरिका में रुकना मुश्किल हो सकता है। यह प्रस्ताव फिलहाल व्हाइट हाउस के ऑफिस ऑफ मैनेजमेंट एंड बजट (OMB) को भेजा गया है। अभी यह नियम नहीं बना है। दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, अमेरिका में H-1B वीजा पर काम कर रहे करीब 5 लाख भारतीयों पर इसका असर पड़ सकता है।

जयशंकर ने उठाया मुद्दा, रुबियो ने दिखाया ठेंगा

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने इसी साल मई में यह मामला अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो के सामने उठाया था। रूबियो ने माना था कि नए इमिग्रेशन सिस्टम में बदलाव के दौरान कुछ दिक्कतें और तनाव हो सकते हैं। हालांकि, रूबियो ने कहा था कि अमेरिका इमिग्रेशन सिस्टम को ज्यादा प्रभावी बनाने की कोशिश कर रहा है और लंबे समय में इसका फायदा सभी पक्षों को मिलेगा। रूबियो ने यह भी कहा था कि यह कदम खासतौर पर भारत को निशाना बनाकर नहीं उठाया गया।

उनके मुताबिक अमेरिका पिछले कुछ सालों में बड़े पैमाने पर अवैध प्रवासियों की समस्या से जूझ रहा है। 2 करोड़ से ज्यादा लोग गैरकानूनी तरीके से अमेरिका में दाखिल हुए और उसी चुनौती से निपटने के लिए यह बदलाव किए जा रहे हैं। इशारा साफ़ है अमेरिका वही करेगा जो उसे ठीक लगता है। उसे भारत की कोई परवाह नहीं है।

अमेरिका में 7 साल रहने वाले प्रवासियों को ग्रीन कार्ड मिलेगा

अमेरिका में रह रहे भारतीय H-1B वीजा धारकों समेत लाखों लोगों के लिए ग्रीन कार्ड पाने का नया मौका मिल सकता है। अमेरिकी सीनेट में एक ऐसा विधेयक पेश किया गया है, जिसमें पिछले 7 साल से लगातार अमेरिका में रह रहे लोगों को ग्रीन कार्ड के लिए आवेदन करने की अनुमति देने का प्रस्ताव है। ग्रीन कार्ड अमेरिका में स्थायी रूप से रहने और काम करने की अनुमति देने वाला आधिकारिक दस्तावेज है। इसे आधिकारिक तौर पर परमानेंट रेजिडेंट कार्ड कहा जाता है।

अभी 60 दिन की H-1B ग्रेस पीरियड कैसे काम करती है?

अगर किसी H-1B कर्मचारी की नौकरी चली जाती है, तो उसे उसी समय अमेरिका छोड़ने की जरूरत नहीं होती। मौजूदा नियमों के मुताबिक, उसे अधिकतम 60 दिन का समय मिल सकता है। इस दौरान वह नई नौकरी खोज सकता है या अमेरिका में अपना स्टेटस बनाए रखने के लिए जरूरी कदम उठा सकता है।

इस दौरान कर्मचारी दूसरी कंपनी में नौकरी खोज सकता है। नई कंपनी उसके लिए H-1B की अर्जी लगा सकती है। नियमों के तहत, कुछ मामलों में कर्मचारी अर्जी मंजूर होने का इंतजार किए बिना नई कंपनी में काम शुरू कर सकता है।

नई नौकरी नहीं मिली तो?

नई नौकरी ढूंढना ही अकेला रास्ता नहीं है। कुछ मामलों में कर्मचारी दूसरे वीजा या स्टेटस के लिए भी अर्जी दे सकता है। जैसे, कुछ शर्तों के तहत वह डिपेंडेंट या विजिटर स्टेटस के लिए आवेदन कर सकता है। अगर वह ग्रीन कार्ड के लिए पहले से योग्य है, तो उसके लिए भी कुछ रास्ते हो सकते हैं। अगर 60 दिन के अंदर कर्मचारी को नई नौकरी नहीं मिली और उसने अपना स्टेटस बदलने के लिए भी कोई कदम नहीं उठाया, तो उसे अमेरिका छोड़ना पड़ सकता है। खासकर तब, जब अमेरिका में रहने की उसकी तय अवधि भी खत्म हो जाए।

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