हेमंत शर्मा, इंदौर। एमपी की इंदौर पुलिस ने नशे के खिलाफ ऐसी मुहिम छेड़ी है, जो सिर्फ कानून की कार्रवाई तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज को जागरूक करने का भी बड़ा प्रयास है। “आई एम स्माइल” अभियान के दूसरे चरण में हजारों लोग सड़कों पर उतरे और एक ही संदेश दिया-नशा छोड़ो, जिंदगी चुनो। आखिर क्या है यह अभियान और पुलिस को इससे क्या उम्मीद है।

इंदौर पुलिस ने शहर को नशा मुक्त बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। 15 जुलाई से शुरू हुए “आई एम स्माइल” अभियान के दूसरे चरण के तहत शहरभर में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। अभियान का मकसद युवाओं और आम लोगों को ड्रग्स और अन्य मादक पदार्थों के दुष्प्रभावों से अवगत कराना है।

इस अभियान में समाज के हर वर्ग की भागीदारी देखने को मिली। महिलाएं, युवा, सामाजिक संगठन और विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधि बड़ी संख्या में शामिल हुए। पुलिस के मुताबिक करीब 3 हजार लोगों ने प्रत्यक्ष रूप से अभियान में भाग लेकर नशे के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद की।

अभियान के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और पुलिस महानिदेशक का संदेश भी लोगों तक पहुंचाया गया। संदेश में बताया गया कि ड्रग्स और नशीले पदार्थ न केवल व्यक्ति के स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाते हैं, बल्कि उसकी कार्यक्षमता, परिवार और पूरे समाज पर भी नकारात्मक असर डालते हैं।

इंदौर पुलिस ने लोगों से अपील की कि वे नशे से दूर रहकर स्वस्थ जीवन अपनाएं और अपने परिवार व समाज के लिए सकारात्मक योगदान दें। पुलिस का मानना है कि जनभागीदारी जितनी बढ़ेगी, नशे के खिलाफ लड़ाई उतनी ही मजबूत होगी।इंदौर पुलिस का कहना है कि अभियान को जनता का अच्छा समर्थन मिल रहा है। यही वजह है कि आने वाले दिनों में इस जागरूकता अभियान को शहर के और अधिक क्षेत्रों तक पहुंचाया जाएगा, ताकि युवाओं को नशे की गिरफ्त में जाने से रोका जा सके।

इंदौर पुलिस कमिश्नर संतोष कुमार सिंह ने कहा कि इंदौर पुलिस द्वारा 15 जुलाई से ‘आई एम स्माइल’ अभियान का दूसरा चरण चलाया जा रहा है। इस अभियान में करीब 3 हजार लोगों ने भाग लिया है। हमारा उद्देश्य लोगों को ड्रग्स और नशीले पदार्थों के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करना है। हम चाहते हैं कि युवा नशे से दूर रहें और स्वस्थ समाज के निर्माण में अपनी भूमिका निभाएं।”

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