हेमंत शर्मा, इंदौर। शहर के राजवाड़ा में आस्था का एक ऐसा मंदिर है, जिसकी कहानी मां और बेटे के रिश्ते से जुड़ी है…
एक ऐसा मंदिर, जहां मां यशोदा की गोद में बाल स्वरूप में विराजे हैं श्रीकृष्ण…मान्यता है कि यहां जन्माष्टमी के दिन गोद भराई कराने से संतान की मनोकामना पूरी होती है…संतान की चाह में सिर्फ देश ही नहीं, बल्कि विदेशों से भी महिलाएं यहां पहुंचती हैं…कोई वर्षों से अधूरी अपनी गोद भरने की प्रार्थना लेकर आती है, तो कोई मनोकामना पूरी होने के बाद कान्हा का आशीर्वाद लेने पहुंचती है। करीब 230 साल पुराने इस अनोखे मंदिर में जन्माष्टमी पर आस्था का ऐसा ही भाव देखने को मिलता है।

मां यशोदा की गोद में बाल स्वरूप श्रीकृष्ण विराजमान

इंदौर के राजवाड़ा की गलियों में स्थित यह मंदिर अपने आप में बेहद खास है…करीब 230 साल पुराना मां यशोदा का यह मंदिर देश का एकमात्र ऐसा मंदिर माना जाता है, जहां मां यशोदा की गोद में बाल स्वरूप श्रीकृष्ण विराजमान हैं।यहां आने वाले भक्तों के लिए यह सिर्फ एक मंदिर नहीं… बल्कि मां और बेटे के उस पवित्र रिश्ते का प्रतीक है, जिसे भगवान श्रीकृष्ण और मां यशोदा ने दुनिया के सामने रखा।इस मंदिर से जुड़ी सबसे बड़ी मान्यता संतान प्राप्ति को लेकर है।कहा जाता है कि जन्माष्टमी के दिन यहां मां यशोदा की गोद भराई कराने से संतान की मनोकामना पूरी होती है।इसी आस्था के चलते जन्माष्टमी पर मंदिर में महिलाओं की लंबी कतारें लगती हैं।

महिलाएं मां यशोदा की गोद भराई की रस्म निभाती

महिलाएं मां यशोदा की गोद भराई की रस्म निभाती हैं और अपनी सूनी गोद में कान्हा जैसी संतान की कामना करती हैं।किसी की आंखों में वर्षों से मां बनने का सपना होता है…तो किसी के हाथों में उस सपने के पूरे होने की उम्मीद…और खास बात यह है कि इस आस्था की सीमा सिर्फ इंदौर या मध्यप्रदेश तक नहीं है।संतान प्राप्ति की मनोकामना लेकर देश के अलग-अलग हिस्सों से ही नहीं, विदेशों से भी श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं।जन्माष्टमी पर मंदिर में होने वाली गोद भराई की रस्म के दौरान महिलाओं के चेहरे पर उम्मीद, आंखों में आस्था और दिल में मां यशोदा से अपनी गोद भरने की प्रार्थना दिखाई देती है।

मंदिर से जुड़ी आस्था वर्षों पुरानी

मंदिर के पुजारी बताते हैं कि इस मंदिर से जुड़ी आस्था वर्षों पुरानी है और जन्माष्टमी पर गोद भराई कराने के लिए बड़ी संख्या में महिलाएं यहां पहुंचती हैं।वहीं, गोद भराई कराने पहुंची महिलाओं के लिए यह पल सिर्फ एक धार्मिक रस्म नहीं… बल्कि मां बनने के सपने को भगवान के सामने रखने का भावुक क्षण होता है।

गोद भरने का आशीर्वाद मांगती

मां यशोदा की गोद में बैठे नन्हे कान्हा को देखकर यहां आने वाली हर मां की आंखों में एक ही सपना दिखाई देता है…कि जिस तरह यशोदा की गोद में कान्हा आए… उसी तरह उनकी सूनी गोद भी खुशियों से भर जाए।करीब 230 साल पुराना यह मंदिर आज भी उसी उम्मीद, उसी आस्था और उसी विश्वास के साथ खड़ा है… जहां जन्माष्टमी पर हर मां अपने मन की मुराद लेकर आती है और कान्हा से अपनी गोद भरने का आशीर्वाद मांगती है।

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