अहमदाबाद। गुजरात के कच्छ जिले के रेगिस्तानी इलाके में पुरातात्विक अध्ययन के लिहाज से एक ऐतिहासिक खोज हुई है। कच्छ यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने एक प्राचीन मानव बस्ती के अवशेषों के साथ 100 से अधिक मानव कंकाल, मिट्टी के बर्तन और टेराकोटा के खिलौने खोज निकाले हैं। वैज्ञानिकों का प्राथमिक अनुमान है कि यह स्थल मध्यकालीन युग या सिंधु घाटी सभ्यता के अंतिम दौर (लेट हड़प्पन पीरियड) का हो सकता है।

BSF की सतर्कता से सामने आई बस्ती
इस पुरातात्विक स्थल की पहली जानकारी सीमा सुरक्षा बल (BSF) के जवानों को गश्त के दौरान मिली थी। इसके बाद कच्छ यूनिवर्सिटी के जियोसाइंस विभाग के प्रभारी डॉ. गौरव चौहान और उनकी टीम ने इस क्षेत्र का विस्तृत सर्वेक्षण किया। शोध में पाया गया कि जहां आज विशाल बंजर रेगिस्तान है, वहां कभी एक समृद्ध और सक्रिय मानव आबादी निवास करती थी।

व्यवस्थित तरीके से दफनाए गए हैं कंकाल
खुली जमीन पर मिले 100 से अधिक नरकंकाल एक ही निश्चित दिशा में और बेहद व्यवस्थित तरीके से दफनाए गए हैं। पुरातत्वविदों का मानना है कि दफनाने का यह तरीका उस काल की विशिष्ट सामाजिक और धार्मिक परंपराओं को रेखांकित करता है। प्राथमिक जांच में इस स्थल को लगभग 1000 से 1500 वर्ष पुराना बताया जा रहा है, जिसके तार ऐतिहासिक विश्व धरोहर ‘धोलावीरा’ और सिंधु घाटी सभ्यता के उत्तर काल से जुड़ते प्रतीत हो रहे हैं।
वैश्विक संस्थाएं करेंगी DNA और कार्बन डेटिंग जांच
इस खोज के सटीक समय और रहस्यों से पर्दा उठाने के लिए बड़े पैमाने पर वैज्ञानिक विश्लेषण की तैयारी शुरू कर दी गई है। अवशेषों की कार्बन डेटिंग और डीएनए परीक्षण के लिए ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी, डेक्कन कॉलेज (पुणे), इसरो और फिजिकल रिसर्च लेबोरेटरी (PRL) जैसी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के साथ संयुक्त शोध किया जाएगा। यदि इन जांचों में प्रारंभिक अनुमानों की पुष्टि होती है, तो यह खोज भारत और कच्छ के प्राचीन इतिहास को एक नया मोड़ देगी।
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