राकेश कथूरिया, कैथल। देश की रक्षा के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले कैथल जिले के रोहेड़ा गांव के वीर सपूत लांस नायक नरेंद्र सिंधु को उनकी अदम्य वीरता और असाधारण साहस के लिए मरणोपरांत शौर्य चक्र से सम्मानित किया गया है। उनकी बहादुरी और कर्तव्य के प्रति समर्पण ने न केवल कैथल बल्कि पूरे देश को गौरवान्वित किया है।

28 वर्षीय लांस नायक नरेंद्र सिंधु भारतीय सेना की 9 राष्ट्रीय राइफल्स (द राजपूताना राइफल्स) में तैनात थे। सितंबर 2025 में जम्मू-कश्मीर के कुलगाम जिले में आतंकवादियों के खिलाफ चलाए गए अभियान के दौरान उन्होंने अदम्य साहस का परिचय देते हुए देश के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया था।

कुलगाम के वन क्षेत्र में चलाया जा रहा था अभियान

8 सितंबर 2025 को सुबह करीब 8:15 बजे कुलगाम के वन क्षेत्र में संयुक्त सर्च एंड डिस्ट्रॉय अभियान चलाया जा रहा था। अभियान के दौरान एक ठिकाने में छिपे आतंकवादियों ने सुरक्षाबलों की टीम पर अचानक अंधाधुंध गोलीबारी शुरू कर दी। आतंकवादियों ने वहां से भागने की भी कोशिश की।

भारी गोलीबारी और बेहद चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बावजूद लांस नायक नरेंद्र सिंधु ने असाधारण संयम और सूझबूझ का परिचय दिया। उन्होंने इस बात का विशेष ध्यान रखा कि उनकी जवाबी गोलीबारी से घेराबंदी के अंदर मौजूद उनके साथी जवानों को किसी तरह का नुकसान न पहुंचे।

गंभीर रूप से घायल होने के बाद भी नहीं छोड़ा मोर्चा

इसी दौरान नजदीक से संदिग्ध गतिविधि दिखाई देने पर नरेंद्र सिंधु ने नियमों के अनुरूप निडरता से आतंकवादी को ललकारा। इसके बाद आतंकवादी की ओर से की गई भीषण गोलीबारी में लांस नायक नरेंद्र सिंधु गंभीर रूप से घायल हो गए।

गंभीर चोट लगने के बावजूद उन्होंने अपना धैर्य नहीं खोया। उन्होंने गोलीबारी के बीच अपनी पोजीशन बदली और सटीक जवाबी कार्रवाई करते हुए आतंकवादी को मार गिराया। बाद में मारे गए आतंकवादी की पहचान ‘कैटेगरी ए+’ के दुर्दांत आतंकवादी के रूप में हुई।

देश की रक्षा करते हुए वीरगति प्राप्त की

मुठभेड़ के बाद गंभीर रूप से घायल लांस नायक नरेंद्र सिंधु को उपचार के लिए वहां से निकाला गया, लेकिन देश की रक्षा करते हुए उन्होंने वीरगति प्राप्त की।

उनकी असाधारण बहादुरी, कर्तव्यनिष्ठा और सर्वोच्च बलिदान को देखते हुए उन्हें मरणोपरांत शौर्य चक्र से सम्मानित करने का फैसला लिया गया। यह सम्मान उनकी वीरता और राष्ट्र के प्रति समर्पण की गवाही है।

माता-पिता ने देश के लिए बेटे को किया समर्पित

शहीद नरेंद्र सिंधु के पिता दलबीर और माता रोशनी देवी ने देश की सेवा के लिए अपने बेटे को समर्पित किया। बेटे की शहादत के बावजूद परिवार ने जिस त्याग और साहस का परिचय दिया, वह पूरे समाज के लिए प्रेरणादायी है।

लांस नायक नरेंद्र सिंधु की वीरता ने उनके परिवार के साथ-साथ रोहेड़ा गांव और कैथल जिले का नाम भी गौरवान्वित किया है।

शहीद परिवार को एक करोड़ रुपये की सहायता

शहीद लांस नायक नरेंद्र सिंधु के परिवार को सरकार की ओर से निर्धारित सहायता और सुविधाएं उपलब्ध कराने में 9 राष्ट्रीय राइफल्स बटालियन तथा जिला सैनिक एवं अर्धसैनिक कल्याण कार्यालय, कैथल ने सहयोग किया।

हरियाणा सरकार की योजना के तहत शहीद परिवार को एक करोड़ रुपये की अनुग्रह राशि प्रदान की गई है। इसके साथ ही परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने से संबंधित आवश्यक कागजी प्रक्रिया भी पूरी कराई गई है।

भारतीय सेना की गौरवशाली परंपरा का उदाहरण

लांस नायक नरेंद्र सिंधु की शहादत भारतीय सेना की गौरवशाली परंपरा, कर्तव्यनिष्ठा और राष्ट्रप्रेम का अनुपम उदाहरण है। देश की रक्षा करते हुए उन्होंने जिस साहस और बहादुरी का परिचय दिया, वह आने वाली पीढ़ियों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत रहेगा। उनके सर्वोच्च बलिदान और अदम्य साहस को देश हमेशा सम्मान के साथ याद रखेगा।

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