दुर्गेश राजपूत, नर्मदापुरम। सतपुड़ा टाइगर रिजर्व में बाघों की सुरक्षा और मॉनिटरिंग को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। प्रबंधन की कथित लापरवाही के कारण छिंदवाड़ा जिले के सीमा के पास छातीआम सामान्य वन मंडल बीट में एक साढ़े चार वर्षीय नर बाघ का 24 दिन पुराना शव मिला है। चौंकाने वाली बात यह है कि टाइगर रिजर्व के अधिकारी इतने दिनों तक बाघ की सुध लेना ही भूल गए।
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यह बाघ बांधवगढ़ से लाया गया था और इसकी गतिविधियों पर नजर रखने के लिए रेडियो कॉलर लगाया गया था। 19 मार्च को जब WWF ने कॉलर आईडी हटाने (ड्रॉप करने) की अनुमति दी, तब STR प्रबंधन हरकत में आया। जब टीम लोकेशन पर पहुँची, तो पता चला कि बाघ की मौत 24 दिन पहले ही हो चुकी थी। साक्ष्य मिटाने के लिए शिकारियों ने रेडियो कॉलर को जलाकर नष्ट कर दिया था, ताकि सिग्नल न मिल सके।
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जांच में सामने आया है कि बाघ को जहर देकर मारा गया था। घटना की भनक तब लगी जब सर्च टीम को मौके पर एक मृत बैल मिला। डॉग स्क्वाड की मदद से टीम मुख्य आरोपी उदेसिंग के खेत तक पहुँची, जहाँ बाघ का शव बरामद हुआ। बताया जा रहा है कि आरोपी इस क्षेत्र में अफीम की अवैध खेती भी करते हैं।
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STR की फील्ड डायरेक्टर राखी नंदा के अनुसार, इस मामले में मुख्य आरोपी उदेसिंग सहित पांच लोगों (बिशनलाल, मनोहर, कैलाल और मानकसिंग) को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है। हालांकि, इस घटना ने रिजर्व की मॉनिटरिंग व्यवस्था की पोल खोल दी है। सवाल यह उठ रहा है कि कॉलर आईडी वाला बाघ 24 दिनों तक गायब रहा और प्रबंधन को इसकी भनक क्यों नहीं लगी? स्थानीय लोगों का आरोप है कि अधिकारी केवल बहानेबाजी कर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रहे हैं।

