Ease of Doing Business: दिल्ली सरकार ने ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ (Ease of Doing Business) पहल के तहत माप-तौल के उपकरणों से जुड़े कारोबारियों को बड़ी राहत दी है। अब माप-तौल के उपकरण बनाने वाले, उनकी मरम्मत करने वाले और डीलरों को लाइसेंस प्राप्त करने से पहले होने वाले अनिवार्य प्री-लाइसेंसिंग निरीक्षण (Pre-Licensing Inspection) से छूट दे दी गई है। अधिकारियों के अनुसार, नई व्यवस्था के तहत कारोबारियों को अब लाइसेंस के लिए आवेदन करते समय ‘सेल्फ-सर्टिफिकेशन’ यानी स्व-प्रमाणन देना होगा। इसके आधार पर लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी और पहले की तरह अनिवार्य भौतिक निरीक्षण की आवश्यकता नहीं होगी।

सरकार ने हाल ही में दिल्ली लीगल मेट्रोलॉजी (एनफोर्समेंट) रूल्स, 2011 में संशोधन किया है, जिसके तहत अब उपकरण निर्माताओं, मरम्मत करने वालों और डीलरों को लाइसेंस लेने से पहले अनिवार्य विभागीय निरीक्षण से छूट मिल जाएगी। अधिकारियों के अनुसार, ‘दिल्ली लीगल मेट्रोलॉजी (एनफोर्समेंट) अमेंडमेंट रूल्स, 2026’ के माध्यम से यह बदलाव लागू किया गया है। इस संबंध में 4 अगस्त 2026 को गजट नोटिफिकेशन भी जारी कर दिया गया है। नई व्यवस्था के तहत वजन और माप के उपकरण बनाने, उनकी मरम्मत करने या उनका व्यापार करने के इच्छुक आवेदक अब लीगल मेट्रोलॉजी विभाग की पूर्व जांच के बजाय सेल्फ-सर्टिफिकेशन (स्व-प्रमाणन) के आधार पर लाइसेंस प्राप्त कर सकेंगे। इससे लाइसेंस जारी होने से पहले होने वाली लंबी निरीक्षण प्रक्रिया की आवश्यकता समाप्त हो जाएगी।

पहले क्या था नियम?

इससे पहले माप-तौल उपकरणों के निर्माता, रिपेयरर और डीलरों को कारोबार शुरू करने से पहले लाइसेंस लेना अनिवार्य था। लाइसेंस जारी करने से पहले विभागीय अधिकारी स्थल का निरीक्षण करते थे और यह जांचते थे कि आवेदक के पास निर्धारित स्थान, आवश्यक उपकरण, औजार, रिकॉर्ड रखने की व्यवस्था, बुनियादी ढांचा और लीगल मेट्रोलॉजी एक्ट के तहत निर्धारित मानकों का पालन हो रहा है या नहीं। निरीक्षण के बाद ही लाइसेंस जारी किया जाता था, जिसके कारण प्रक्रिया में समय लगता था। नई व्यवस्था में यह प्रारंभिक जांच अनिवार्य नहीं होगी और आवेदनकर्ता अपने स्तर पर मानकों के अनुपालन का प्रमाण प्रस्तुत कर सकेंगे।

ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को मिलेगा बढ़ावा

सरकार का कहना है कि इस कदम से कारोबार शुरू करने की प्रक्रिया आसान होगी और उद्यमियों को अनावश्यक देरी का सामना नहीं करना पड़ेगा। यह फैसला दिल्ली में निवेश और व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से उठाए गए सुधारात्मक कदमों का हिस्सा है। हालांकि, अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि सेल्फ-सर्टिफिकेशन का अर्थ नियमों से छूट नहीं है। विभाग बाद में किसी भी समय सत्यापन या निरीक्षण कर सकता है और यदि नियमों के उल्लंघन या गलत जानकारी देने का मामला सामने आता है तो संबंधित व्यक्ति या संस्था के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

लाइसेंस रिन्यू कराने की अनिवार्यता भी खत्म

दिल्ली सरकार द्वारा माप-तौल के उपकरणों से जुड़े कारोबार के लिए नियमों में किए गए बदलावों से उद्यमियों को बड़ी राहत मिली है। प्री-लाइसेंसिंग निरीक्षण की अनिवार्यता समाप्त करने के बाद अब लाइसेंस के बार-बार नवीनीकरण (रिन्यूअल) की आवश्यकता भी खत्म कर दी गई है। अधिकारियों के अनुसार, दिल्ली लीगल मेट्रोलॉजी (एनफोर्समेंट) अमेंडमेंट रूल्स, 2026 के तहत लाइसेंसिंग प्रक्रिया को अधिक सरल और व्यवसाय-अनुकूल बनाया गया है। नई व्यवस्था का उद्देश्य कारोबार शुरू करने और संचालित करने में आने वाली प्रशासनिक बाधाओं को कम करना तथा ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ को बढ़ावा देना है।

नए नियमों के तहत एक बार जारी किया गया लाइसेंस तब तक वैध रहेगा, जब तक कि नियमों के उल्लंघन, अनियमितताओं या अन्य वैधानिक कारणों से उसे निलंबित (सस्पेंड) या रद्द (कैंसल) नहीं किया जाता। इससे कारोबारियों को समय-समय पर लाइसेंस रिन्यू कराने की प्रक्रिया से गुजरने की आवश्यकता नहीं होगी। अधिकारियों ने बताया कि वजन और माप से जुड़े उपकरण, बाट और माप खुदरा तथा थोक व्यापार व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। बाजार में वस्तुओं की सही मात्रा और पारदर्शी लेनदेन सुनिश्चित करने में इनकी अहम भूमिका होती है। इसलिए इस क्षेत्र में प्रक्रियाओं को सरल बनाने के साथ-साथ नियामकीय मानकों का पालन भी सुनिश्चित किया जाएगा।

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