जयनगर (कोडरमा)। देश के संवेदनशील औद्योगिक और रणनीतिक प्रतिष्ठानों की सुरक्षा को और मजबूत करने के लिए केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) ने ड्रोन तकनीक के क्षेत्र में अहम पहल की है। उभरते हवाई खतरों और ड्रोन के संभावित दुरुपयोग से निपटने के लिए CISF ने ड्रोन फेडरेशन ऑफ इंडिया (DFI) के साथ समझौता ज्ञापन (MoU) किया है। इस साझेदारी से बल की ड्रोन निगरानी और काउंटर-ड्रोन क्षमता को आधुनिक तकनीक के साथ और मजबूत किया जाएगा।
3 हजार से ज्यादा जवानों को मिल चुका है प्रशिक्षण
केटीपीएस कोडरमा में तैनात CISF के डिप्टी कमांडेंट महेश कुमार ने बताया कि भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों को देखते हुए बल अपने कर्मियों को लगातार तकनीकी प्रशिक्षण दे रहा है। अब तक 3 हजार से अधिक CISF कर्मियों को ड्रोन और एंटी-ड्रोन प्रोटोकॉल का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जा चुका है।
80 CISF इकाइयों में ड्रोन से निगरानी
CISF पारंपरिक सुरक्षा व्यवस्था के साथ आधुनिक सर्विलांस तकनीक को भी तेजी से अपना रहा है। देशभर में करीब 80 CISF इकाइयां अपने निर्धारित कार्यक्षेत्रों में हवाई निगरानी और संभावित खतरों की पहचान के लिए ड्रोन तकनीक का इस्तेमाल कर रही हैं।
न्यूक्लियर प्लांट से रिफाइनरी तक सुरक्षा होगी और मजबूत
नए MoU के बाद CISF कर्मियों की तकनीकी दक्षता बढ़ाने के साथ ड्रोन आधारित सुरक्षा व्यवस्था को भी बेहतर बनाने पर जोर दिया जाएगा। इसका सीधा लाभ न्यूक्लियर प्लांट, रिफाइनरी और अन्य महत्वपूर्ण औद्योगिक प्रतिष्ठानों की सुरक्षा में मिलने की उम्मीद है।
बहरोड़ में बनेगा ड्रोन-काउंटर ड्रोन सेंटर
समझौते के तहत राजस्थान के बहरोड़ स्थित CISF आरटीसी को ड्रोन और काउंटर-ड्रोन सिस्टम के लिए आधिकारिक ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ के रूप में विकसित किया जाएगा। यहां तकनीकी प्रशिक्षण, क्षमता निर्माण और आधुनिक सुरक्षा प्रणालियों से जुड़ी विशेषज्ञता विकसित करने पर काम होगा।
CISF मुख्यालय में हुआ समझौता
नई दिल्ली स्थित CISF मुख्यालय में आयोजित कार्यक्रम के दौरान एमपीआरटीसी बहरोड़ के डीआइजी डॉ. सीडी नाइक और ड्रोन फेडरेशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष स्मित शाह ने MoU पर हस्ताक्षर किए। इस दौरान CISF के महानिदेशक प्रवीर रंजन समेत बल के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
बदलते हवाई खतरों पर फोकस
CISF की यह पहल ऐसे समय में महत्वपूर्ण मानी जा रही है, जब ड्रोन तकनीक का इस्तेमाल निगरानी से लेकर सुरक्षा चुनौतियों तक कई क्षेत्रों में तेजी से बढ़ रहा है। MoU के जरिए बल का लक्ष्य आधुनिक ड्रोन तकनीक और काउंटर-ड्रोन उपायों को सुरक्षा व्यवस्था का मजबूत हिस्सा बनाना है।



