मणिपुर में पिछले 3 वर्षो से भड़की हिंसा थमने का नाम नहीं ले रही है. 3 साल पहले भड़की जातीय हिंसा के सैकड़ों लोग शिकार हुए, कई बेगुनाह मारे गए. लम्बे समय तक राष्ट्रपति शासन भी लगा रहा लेकिन वहां हालात है जो सुधरने का नाम ही नहीं ले रहे हैं. जब भी लगता है कि हालात थोड़े सुधर रहे हैं, कोई न कोई चिंगारी पूरे राज्य को फिर से सुलगा देती है. ताजा मामला कांगपोकपी जिले का सामने आया है.
क्या है पूरा मामला ?
पिछले महीने की 13 तारीख को जिन 6 नागा लोगों को अगवा किया गया था, 28 दिन बाद उनके शव बरामद हुए हैं. इस घटना ने एक बार फिर घाटी को सुलगा दिया है. इंफाल वेस्ट में हजारों लोग सड़कों पर उतर आए हैं. इस दर्द और गुस्से के विरोध में यूनाइटेड नागा काउंसिल ने 24 घंटे के बंद का ऐलान किया है.
लेइलोन वाइफेई गांव से 13 मई को किए गए थे अगवा
गुरुवार तड़के शवों के पहुंचने पर इंफाल के जवाहरलाल इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (JNIMS) मुर्दाघर के बाहर सैकड़ों लोग जमा हो गए. कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए अस्पताल परिसर के चारों ओर भारी संख्या में पुलिसबल की तैनाती थी. ये सभी लोग मणिपुर के लेइलोन वाइफेई गांव से 13 मई को कथित तौर पर अगवा किए गए थे. गुरुवार सुबह सभी छह नागा पुरुषों के शवों को कड़ी सुरक्षा के बीच जेएनआईएमएस लाया गया. पुलिस का कहना है कि करीब 24 घंटे की तलाशी के बाद शव बरामद किए गए.
डिप्टी सीएम नेमचा किपगेन को हटाने की मांग तेज
नागा संगठनों ने डिप्टी सीएम नेमचा किपगेन को हटाने की मांग तेज कर दी है. UNC का आरोप है कि उनका संबंध KNF-P प्रमुख सेमटिनथांग किपगेन से है. KNF-P वही संगठन है जो सरकार के साथ Suspension of Operations समझौते में शामिल है. नागा नेताओं का कहना है कि जब तक ऐसे समझौते खत्म नहीं होंगे, तब तक आम लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं हो सकती. हालांकि सरकार की तरफ से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है.
अस्पताल के बाहर भारी आक्रोश, पुलिस ने दागे आंसू गैस के गोले
जब इन शवों को जेएनआईएमएस मुर्दाघर लाया गया. बाहर लोगों की भारी भीड़ थी. पीड़ित परिवारों और लियांगमाई नागा समुदाय के बीच जबरदस्त आक्रोश था. पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस का इस्तेमाल किया. रिश्तेदार अभी भी शवों की औपचारिक पहचान का इंतजार कर रहे हैं और समुदाय के नेताओं पर सवाल उठा रहे हैं कि शवों को इंफाल लाने में लगभग एक महीने का समय क्यों लगा? सवाल जायज है. इस पूरे मामले में लियांगमाई नागा परिषद के अध्यक्ष टिमोथी विजुनामेई ने मीडिया से बातचीत में कहा कि हमें अभी-अभी छह लोगों के शव मिले हैं. ये शव हमें मृत अवस्था में मिले हैं. इससे हमें गहरा सदमा लगा है और हम पूरी तरह टूट चुके हैं.
‘शवों को लाने में 28 दिन लग गए, हम सरकार से निराश’
विजुनामेई ने कहा कि शवों को मुर्दाघर में लाया गया है, लेकिन परिवारों और समुदाय के नेताओं ने अभी तक उनकी पहचान नहीं की है.हमने अभी तक यह पता नहीं लगाया है कि कौन कौन है. हम चेहरों की पहचान करने और यह सुनिश्चित करने का इंतजार कर रहे हैं कि क्या वे वास्तव में हमारे छह लापता लोग हैं. विजुनामेई ने आगे कहा कि शवों की पहचान और सत्यापन के बाद, रिश्तेदार और समुदाय के नेता सामूहिक रूप से यह तय करेंगे कि शवों को औपचारिक रूप से प्राप्त किया जाए या नहीं.
उन्होंने कहा कि शवों को यहां लाने में उन्हें 28 दिन लग गए. हम सरकार के रवैये से बेहद निराश हैं. वहीं मणिपुर पुलिस ने बयान जारी कर कहा, राज्य की पुलिस, CRPF और असम राइफल्स के लगभग 450 जवानों ने खोजी कुत्तों और फोरेंसिक एक्सपर्ट टीमों की मदद से सर्च ऑपरेशन चलाया. 24 घंटे की तलाशी के बाद आज दोपहर छह लोगों के शव बरामद किए गए.
माना जा रहा है कि मृतक 13 मई 2026 को लेइलोन वाइफेई से बंधक बनाए गए लोगों में शामिल थे. पुलिस ने कहा कि जरूरी कानूनी औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं और मामले की जांच चल रही है. नागालैंड और मेघालय के सीएम ने इस घटना की कड़ी निंदा की.
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