अमेरिका और चीन के बीच संतुलन साधने की पाकिस्तान की कोशिश उसपर ही भारी पड़ती नजर आ रही है। पाकिस्तान दौरे के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के आगे पीछे घूमने वाले पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर को चीन से बड़ा झटका लगा है। दरअसल, पाकिस्तान ने चीन से परमाणु चालित पनडुब्बी हासिल करने की कोशिश की, लेकिन बीजिंग ने इस मांग को ठुकरा दिया।
बता दें ये वही चीन है जिसने एक दौर में पाकिस्तान को परमाणु हथियार संपन्न राष्ट्र बनने में मदद की थी। लेकिन अब हालात बदल गए हैं। कहा जा रहा है कि, मुनीर का अमेरिका की ओर बढ़ता झुकाव चीन की आँखों में खटक रहा है। अमेरिका की ड्राप साइट न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान समुद्र के भीतर से परमाणु जवाबी हमला करने की क्षमता विकसित करना चाहता है। इसके लिए उसने 2024 में चीन के साथ रणनीतिक समझौते की कोशिश की थी।
पाकिस्तान ने प्रस्ताव दिया था कि ग्वादर नौसेना बेस तक चीन को व्यापक पहुंच देने के बदले उसे परमाणु चालित पनडुब्बी तकनीक उपलब्ध कराई जाए। रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान ने चीन को यह व्यक्तिगत आश्वासन भी दिया था कि ग्वादर को चीनी सेना के स्थायी नौसैनिक अड्डे के रूप में विकसित किया जाएगा। हालांकि चीन को पाकिस्तान की यह मांग अव्यावहारिक लगी और दोनों देशों के बीच बातचीत आगे नहीं बढ़ सकी।
परमाणु पनडुब्बी क्षमता हासिल करना चाहता है पाकिस्तान
परमाणु हथियार ले जाने वाली पनडुब्बियां मुख्य रूप से तीन प्रकार की होती हैं। इनमें परमाणु ऊर्जा से चलने वाली बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बियां, क्रूज मिसाइलों से लैस पारंपरिक पनडुब्बियां और बैलिस्टिक मिसाइलों से लैस पारंपरिक पनडुब्बियां शामिल हैं।
ड्राप साइट न्यूज की रिपोर्ट में यह स्पष्ट नहीं किया गया कि पाकिस्तान किस प्रकार की क्षमता चाहता था, लेकिन माना जा रहा है कि इस्लामाबाद समुद्र आधारित परमाणु प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करना चाहता है।
चीन पहले भी पाकिस्तान के परमाणु और मिसाइल कार्यक्रम में महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुका है। 1970 और 1980 के दशक में चीन ने पाकिस्तान को अत्यधिक समृद्ध यूरेनियम और परमाणु हथियार डिजाइन उपलब्ध कराए थे। बाद में 1990 के दशक में चीन ने पाकिस्तान को एम-11 मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलें भी दी थीं।
दुनिया के चुनिंदा देशों के पास ही यह क्षमता
वर्तमान में दुनिया के केवल छह देशों-अमेरिका, रूस, चीन, फ्रांस, ब्रिटेन और भारत-के पास परमाणु चालित बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बियां हैं। इजरायल के पास परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम क्रूज मिसाइल पनडुब्बियां हैं, जबकि उत्तर कोरिया के पास सीमित समुद्र आधारित परमाणु क्षमता है।
पाकिस्तान ने 2017 में पनडुब्बी से दागी जाने वाली 450 किलोमीटर मारक क्षमता वाली क्रूज मिसाइल के परीक्षण के बाद परमाणु त्रिशक्ति हासिल करने का दावा किया था। त्रिशक्ति यानी जमीन, हवा और पानी से हमला करने की क्षमता। हालांकि उसके पास फिलहाल केवल पांच पारंपरिक पनडुब्बियों का छोटा बेड़ा है।
मुनीर के दौर में चीन से बढ़ी दूरी
रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान और चीन के बीच समुद्र आधारित परमाणु प्रतिरोधक क्षमता को लेकर प्रस्तावित तीन-स्तरीय समझौता पूरा नहीं हो सका। इसके पीछे पाकिस्तान की बदलती रणनीतिक प्राथमिकताओं को भी वजह माना जा रहा है।
नवंबर 2022 में सेना प्रमुख बनने के बाद आसिम मुनीर ने पाकिस्तान को अमेरिका के अधिक करीब लाने की कोशिश की। इस दौरान चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (सीपीईसी) परियोजनाओं की रफ्तार भी धीमी पड़ गई। निर्माण कार्य में लगे चीनी नागरिकों की सुरक्षा को लेकर बीजिंग लगातार चिंता जताता रहा, लेकिन पाकिस्तान की ओर से अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई।
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