सुरेश पांडेय, सिंगरौली। जिला अस्पताल और ट्रॉमा सेंटर की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें एक व्यक्ति ने महिला चिकित्सक डॉ. अम्बे शाह पर इलाज के एवज में पैसे लेने के गंभीर आरोप लगाए हैं। वायरल वीडियो में पीड़ित व्यक्ति सुरेश पाण्डेय (मोबाइल नंबर: 7000137057) नजर आ रहे हैं, जिन्होंने अस्पताल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर असंतोष जताया है।
इलाज के बजाय विवाद पर उतरीं डॉक्टर
वायरल वीडियो सामने आने के बाद मामला शांत होने के बजाय तूल पकड़ गया। कथित तौर पर डॉ. अम्बे शाह संबंधित व्यक्ति से स्पष्टीकरण या विवाद करने के लिए अस्पताल पहुंच गईं। ड्यूटी के दौरान डॉक्टर और उस व्यक्ति के बीच काफी देर तक तीखी बहस होती रही। इस घटना ने बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि जब सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों के पास मरीजों की जांच और इलाज के लिए समय का अभाव रहता है, तब इस तरह के विवादों में उलझने के लिए इतना समय कैसे मिल जाता है।
कल्पना मिश्रा की घटना के बाद भी सिहरन बाकी
रीवा संभाग के अंतर्गत आने वाले सिंगरौली जिले की चिकित्सा व्यवस्थाएं पहले भी सुर्खियों में रही हैं। पूर्व में कल्पना मिश्रा की मौत के बाद यह उम्मीद जताई जा रही थी कि स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार होगा और आम जनता को सुलभ व बेहतर इलाज मिल सकेगा। हालांकि, धरातल पर स्थिति जस की तस बनी हुई है। विशेषकर गायनिक (स्त्री एवं प्रसूति) विभाग की व्यवस्थाएं आज भी नाकाफी साबित हो रही हैं, जिससे गर्भवती महिलाओं और उनके परिजनों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
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गरीबों की आखिरी उम्मीद पर सवाल
निजी अस्पतालों का भारी-भरकम खर्च उठाने में असमर्थ गरीब और मध्यमवर्गीय परिवार अपनी सेहत के लिए पूरी तरह सरकारी स्वास्थ्य सुविधाओं पर निर्भर होते हैं। ऐसे में यदि अस्पतालों में डॉक्टरों की लापरवाही, समय पर इलाज न मिलने की शिकायतें और इस प्रकार की विवादित घटनाएं सामने आती हैं, तो यह सीधे तौर पर प्रशासनिक तंत्र की विफलता को दर्शाती हैं।
व्यवस्था पर जनता का भरोसा कायम रह सके
फिलहाल सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है, जो कि उच्च स्तरीय जांच का विषय है। लेकिन इस घटना ने यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या सरकारी अस्पतालों में मरीजों के जीवन की रक्षा से ज्यादा जरूरी आपसी विवादों को निपटाना बन गया है? जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के उच्च अधिकारियों को इस मामले का संज्ञान लेकर निष्पक्ष जांच करनी चाहिए ताकि व्यवस्था पर जनता का भरोसा कायम रह सके।
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