Dharm Desk – अधिक मास में आने वाली परमा एकादशी को सभी एकादशियों में अत्यंत शुभ कहा गया है. यह दुर्लभ व्रत हर तीन वर्ष में एक बार आता है. इसे भीमसेनी तथा पुरुषोत्तमी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है. आज तिथि का आधा दिन बीत चुका है ऐसे में अब व्रत के साथ-साथ कथा पढ़ने और सुनने का महत्व है. इस दिन भगवान विष्णु की पूजा, भजन और कथा श्रवण से पाप, दु:ख और दरिद्रता दूर होने लगती है. धार्मिक मान्यता है कि, इस व्रत का फल अनेक यज्ञों और तीर्थों के बराबर होता है.

कथा श्रवण का क्यों है विशेष महत्व

पद्म पुराण के अनुसार इस एकादशी की कथा स्वयं भगवान श्रीकृष्ण ने धर्मराज युधिष्ठिर को सुनाई थी. मान्यता है कि जो व्यक्ति दिन के शेष समय में भी श्रद्धा से कथा सुनता या पढ़ता है. उसे पूर्ण व्रत के समान फल प्राप्त होता है.

गरीबी से समृद्धि तक की चमत्कारी कथा

कथा कुछ इस तरह है, प्राचीन समय में काम्पिल्य नगरी में सुमेधा नाम का एक ब्राह्मण अपनी पतिव्रता पत्नी के साथ रहता था. दोनों अत्यंत गरीब थे, कई बार भोजन तक नसीब नहीं होता था, लेकिन पत्नी कभी शिकायत नहीं करती थी और अतिथि सेवा में लगी रहती थी. एक दिन सुमेधा ने धन कमाने के लिए बाहर जाने की इच्छा जताई, लेकिन पत्नी ने भाग्य और धैर्य का महत्व समझाते हुए उन्हें रोक लिया.

कुछ समय बाद उनके घर कौण्डिन्य ऋषि आए. दंपती ने श्रद्धा से उनका स्वागत किया. तब ब्राह्मणी ने अपनी गरीबी दूर करने का उपाय पूछा. ऋषि ने अधिकमास की कृष्ण पक्ष की परमा एकादशी का व्रत करने की सलाह दी और बताया कि यह व्रत सभी कष्टों को दूर करने वाला है.

व्रत का प्रभाव और जीवन में बदलाव

ऋषि की बात मानकर दोनों ने पूरी श्रद्धा से व्रत और रात्रि जागरण किया. इसके प्रभाव से उनके जीवन में चमत्कारी परिवर्तन आया. एक राजकुमार ने उन्हें घर और आजीविका के लिए गांव प्रदान किया. जिससे उनकी गरीबी समाप्त हो गई. अंततः वे सुख-समृद्धि से जीवन जीते हुए स्वर्ग को प्राप्त हुए.