बिहार भर में आज जन्माष्टमी का पर्व बेहद धूमधाम और हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है। राजधानी पटना के प्रसिद्ध इस्कॉन मंदिर में इस पावन अवसर पर श्रद्धालुओं का तांता लगा हुआ है। मंदिर को भव्य रूप से सजाया गया है, जिसमें विशेष तौर पर 8 टन फूलों का इस्तेमाल किया गया है। यहाँ मुख्य पूजा की शुरुआत रात्रि 11 बजे से निर्धारित है, जिसके तहत 108 चांदी के कलशों से भगवान का महाअभिषेक किया जाएगा। इस ऐतिहासिक आयोजन के दौरान मंदिर परिसर की सुरक्षा और व्यवस्थाओं पर विशेष नजर रखी जा रही है।

​गणमान्य अतिथियों की उपस्थिति और अनुष्ठान

​जन्माष्टमी के इस पावन पर्व पर कई दिग्गज नेता और प्रशासनिक अधिकारी भगवान श्री कृष्ण के दर्शन के लिए पहुंचे। स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार ने पारंपरिक रूप से शंख के माध्यम से राधा-कृष्ण का अभिषेक किया। इसके बाद, प्रदेश के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) सैयद अता हसनैन ने मंदिर पहुंचकर भगवान की आरती उतारी और बाल कृष्ण को श्रद्धाभाव से झूला झुलाया। बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और उप मुख्यमंत्री विजय चौधरी ने भी इस्कॉन मंदिर में हाजिरी लगाई। सीएम सम्राट चौधरी ने विधि-विधान के साथ भगवान श्री कृष्ण की पूजा-अर्चना की और आरती में हिस्सा लिया।

​दुर्लभ ज्योतिषीय संयोग और योग

​इस बार की जन्माष्टमी कई मायनों में बेहद खास और फलदायी मानी जा रही है। आज अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र का एक दुर्लभ संयोग बन रहा है। इसके अतिरिक्त, वृष राशि के चंद्रमा की साक्षी, वृष लग्न, रोहिणी और मृगशिरा नक्षत्र का युग्म संयोग, तथा हर्षण और वज्र योग जैसे शुभ योग भी इस पर्व के महत्व को कई गुना बढ़ा रहे हैं। ज्योतिषीय दृष्टिकोण से ऐसा अद्भुत योग साधना और पूजन के लिए अत्यंत उत्तम माना जाता है, जिससे दर्शन मात्र से भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होने की मान्यता है।

​सुरक्षा के कड़े इंतजाम और दर्शन व्यवस्था

​भारी भीड़ को नियंत्रित करने और सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद रखने के लिए मंदिर परिसर में 150 से अधिक सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं, जिनके जरिए चप्पे-चप्पे पर नजर रखी जा रही है। प्रबंधन की ओर से आने वाले भक्तों के लिए कुछ सख्त निर्देश जारी किए गए हैं। भक्तों से अनुरोध किया गया है कि वे मंदिर में प्रवेश करने से पहले अपने जूते-चप्पलों की सुरक्षा की व्यवस्था स्वयं सुनिश्चित करें। सुरक्षा कारणों से मंदिर परिसर में किसी को भी रुकने की अनुमति नहीं दी गई है। भीड़ के अत्यधिक दबाव को देखते हुए ऐसी व्यवस्था की गई है कि भक्त एक निर्धारित मार्ग से अंदर प्रवेश करेंगे, भगवान के दर्शन करने के तुरंत बाद बाहर निकल जाएंगे। श्रद्धालुओं के लिए प्रवेश द्वार बीएसएनएल ऑफिस की ओर से रखा गया है, ताकि आवागमन सुचारू रूप से चलता रहे।