ईरान अमेरिका युद्ध का असर भले अबतक भारत पर ज्यादा न पड़ा हो लेकिन ये तूफान से पहले की शांति साबित होने वाली है। दरअसल, कच्चे तेल के दामों पर इस युद्ध का सीधा असर पड़ रहा है। ऐसे में आने वाले दिनों में पेट्रोल और डीजल के दामों में बढ़ोतरी हो सकती है। यह दावा ग्लोबल फाइनेंशियल सर्विसेज ग्रुप मैक्वेरी की ‘इंडिया फ्यूल रिटेल’ ने किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, पेट्रोल-डीजल की कीमत 135-165 डॉलर (करीब 12 से 15,500 रुपये) प्रति बैरल होने पर तेल कंपनियों को प्रति लीटर पेट्रोल पर 18 रुपये और डीजल पर 35 रुपये का नुकसान हो रहा है।

सरकार को बस बंगाल और तमिलनाडु चुनाव का इंतेजार

रिपोर्ट के मुताबिक, कच्चे तेल के दाम जैसे जैसे बढ़ रहे हैं, उतना घाटा बढ़ रहा है। ऐसे में भारत की 3 प्रमुख तेल कंपनियां 2,400 करोड़ रुपये का नुकसान उठा रही हैं। बताया जा रहा है कि पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में होने वाले विधानसभा चुनाव के बाद पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी होने की संभावना है। पेट्रोल के दामों में 18 रुपये और डीजल 35 रुपये प्रति लीटर तक बढ़ाया जा सकता है।

सरकारी राहत के बावजूद घाटा

रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले दिनों संकट को देखते हुए केंद्र सरकार ने पेट्रोल डीजल पर 10-10 रुपये प्रति लीटर उत्पाद शुल्क में कटौती की है, लेकिन फिर भी घाटा जारी है। हालांकि, सरकारी मदद से घाटा घटकर 2,400 करोड़ रुपये की जगह 1,600 करोड़ रुपये प्रतिदिन हो गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, कच्चे तेल की कीमत में 10 डॉलर प्रति बैरल के उछाल से कंपनियों को 6 रुपये प्रति लीटर का नुकसान होता है। हालांकि, बीते दिनों राजनाथ सिंह ने जनता को भरोसा दिलाया था कि देश में पेट्रोल और डीजल के दाम नहीं बढ़ेंगे।

पूरी दुनिया में संकट के बादल

होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने और पश्चिम एशिया में युद्ध के बाद के असर से कच्चे तेल की कीमतों का वैश्विक असर दिख रहा है। अमेरिका और यूरोप समेत कई अन्य देशों में भी तेल की कीमतें बढ़ी हैं। यह संकट आने वाले दिनों में और बढ़ेगा। बता दें कि भारत अपनी जरूरत का करीब 88 प्रतिशत कच्चा तेल बाहर से मंगवाता है, जिसमें 45 प्रतिशत मध्य पूर्व और 35 प्रतिशत रूस से आता है।

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