भारत ने पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (पीओजेके) में सरकार विरोधी प्रदर्शनों पर पाकिस्तानी प्रशासन की कार्रवाई की कड़ी निंदा की है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रंधीर जायसवाल ने कहा कि पीओजेके में जारी विरोध प्रदर्शन पाकिस्तान के दशकों पुराने अवैध कब्जे, शोषण, मौलिक अधिकारों के हनन और प्रशासनिक दमन का परिणाम हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि स्थानीय जनता की जायज मांगों को सुनने के बजाय पाकिस्तान बल प्रयोग और दमनकारी कदमों का सहारा ले रहा है।
महिलाओं-बच्चों पर कार्रवाई, इंटरनेट बंद और आवश्यक सेवाएं बाधित
रंधीर जायसवाल ने कहा कि पाकिस्तानी प्रशासन ने प्रदर्शनकारियों को दबाने के लिए अत्यधिक पुलिस बल का इस्तेमाल किया। उन्होंने आरोप लगाया कि महिलाओं और बच्चों के खिलाफ कार्रवाई, भोजन एवं दवाओं जैसी आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति रोकना, लंबे समय तक इंटरनेट सेवा बंद रखना और निहत्थे नागरिकों पर घातक बल का प्रयोग गंभीर मानवाधिकार उल्लंघन हैं। भारत ने इन घटनाओं के लिए पाकिस्तान को जिम्मेदार ठहराते हुए अंतरराष्ट्रीय समुदाय से जवाबदेही सुनिश्चित करने की अपील की।
फायरिंग में छह लोगों की मौत, तनाव और बढ़ा
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, मंगलवार को गुलाम जम्मू-कश्मीर (पीओजेके) के रावलकोट स्थित मटियाल मीरा बस टर्मिनल के पास प्रदर्शन के दौरान पाकिस्तानी सुरक्षा बलों की फायरिंग में छह लोगों की मौत हो गई। घटना के बाद पूरे इलाके में तनाव बढ़ गया। प्रदर्शनकारी नागरिक इलाकों से सेना हटाने, इंटरनेट सेवा बहाल करने और निहत्थे लोगों के खिलाफ बल प्रयोग रोकने की मांग कर रहे थे।
आर्थिक संकट और खाद्य असुरक्षा से बढ़ा असंतोष
स्थानीय लोगों का कहना है कि पीओजेके में आर्थिक संकट, खाद्य असुरक्षा और बुनियादी सुविधाओं की कमी ने हालात को और गंभीर बना दिया है। प्रदर्शनकारियों ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से हस्तक्षेप की मांग की है। कुछ समूहों ने मानवीय सहायता पहुंचाने के लिए नियंत्रण रेखा (एलओसी) पर पुंछ और डोडा सेक्टर खोलने की भी अपील की है।
अमेरिका में भी उठी पीओजेके का मुद्दा
इस बीच, पीओजेके समुदाय के कुछ लोगों ने अमेरिका में व्हाइट हाउस के बाहर प्रदर्शन कर क्षेत्र की बिगड़ती मानवीय स्थिति की ओर अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान आकर्षित करने की कोशिश की।
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